महाराष्ट्र बंद के एक दिन बाद, पुलिस ने रद्द किया जिग्नेश मेवानी का मुंबई में आयोजित होने वाला कार्यक्रम
- महाराष्ट्र बंद के अगले दिन मुंबई पुलिस ने एक समारोह को रद्द कर दिया
- इस कार्यक्रम में दलित नेता जिग्नेश मेवानी को शिरकत करनी थी
- दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के उमर खालिद को भी जाना था
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मुंबई:
दलितों द्वारा आहूत किए गए महाराष्ट्र बंद के अगले दिन गुरुवार को मुंबई पुलिस ने एक समारोह को रद्द कर दिया है, जिसमें हाल ही में विधायक बने गुजरात के दलित नेता जिग्नेश मेवानी तथा दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के उमर खालिद को शिरकत करनी थी. पुलिस ने कार्यक्रम के आयोजक विद्यार्थियों को भी सावधानीवश हिरासत में ले लिया है.
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दक्षिणपंथी गुटों ने जिग्नेश मेवानी और उमर खालिद पर राज्य में जातीय तनाव भड़काने का आरोप लगाया है. मंगलवार को जब मुंबई में कथित रूप से दलित समर्थक प्रदर्शनकारी सड़क तथा रेल यातायात को बाधित कर रहे थे, पुणे पुलिस के पास जिग्नेश मेवानी के खिलाफ केस दर्ज करवाया गया था.
शिकायत में कहा गया है कि जिग्नेश मेवानी और उमर खालिद ने 31 दिसंबर को 'एलगर परिषद' नामक कार्यक्रम में शिरकत की, जो भीमा-कोरेगांव युद्ध की 200वीं वर्षगांठ मनाने के लिए आयोजित किया गया था. इसके अगले ही दिन, 1 जनवरी को जश्न में शामिल होने गांव पहुंचे दलितों तथा कुछ स्थानीय दक्षिणपंथी गुटों के बीच झड़पें हो गईं. इन हिंसक झड़पों में 28-वर्षीय एक मराठा युवक मारा गया, और 12 अन्य लोग ज़ख्मी हो गए.
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मंगलवार को मुंबई में भी बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, तथा दलित समूहों ने समूचे महाराष्ट्र में 3 जनवरी को बंद का आह्वान किया. बुधवार शाम को जिग्नेश मेवानी ने शांति की अपील करते हुए ट्वीट किया, "महाराष्ट्र सरकार को कानून एवं व्यवस्था को सुनिश्चित करना चाहिए... मैं महाराष्ट्र की जनता से शांति बनाए रखने की अपील करता हूं..."
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दक्षिणपंथी गुटों ने जिग्नेश मेवानी और उमर खालिद पर राज्य में जातीय तनाव भड़काने का आरोप लगाया है. मंगलवार को जब मुंबई में कथित रूप से दलित समर्थक प्रदर्शनकारी सड़क तथा रेल यातायात को बाधित कर रहे थे, पुणे पुलिस के पास जिग्नेश मेवानी के खिलाफ केस दर्ज करवाया गया था.
शिकायत में कहा गया है कि जिग्नेश मेवानी और उमर खालिद ने 31 दिसंबर को 'एलगर परिषद' नामक कार्यक्रम में शिरकत की, जो भीमा-कोरेगांव युद्ध की 200वीं वर्षगांठ मनाने के लिए आयोजित किया गया था. इसके अगले ही दिन, 1 जनवरी को जश्न में शामिल होने गांव पहुंचे दलितों तथा कुछ स्थानीय दक्षिणपंथी गुटों के बीच झड़पें हो गईं. इन हिंसक झड़पों में 28-वर्षीय एक मराठा युवक मारा गया, और 12 अन्य लोग ज़ख्मी हो गए.
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