- राजस्थान में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर कार में आग लगने से MP के एक परिवार के पांच सदस्यों की मौत हुई थी
- मृतक परिवार श्योपुर के चैनपुरा बस्ती का निवासी था जो वैष्णो माता के दर्शन करके वापस लौट रहा था
- आग इतनी भीषण थी कि शव पूरी तरह जल गए और केवल राख व हड्डियों को इकट्ठा कर कागज के डिब्बों में रखा गया
इंसानी नियति का इससे क्रूर चेहरा और क्या होगा कि जिन अपनों को वैष्णो माता के दरबार के लिए हंसते-मुस्कुराते विदा किया था, उनकी वापसी कंधों पर रखे लकड़ी के उन डिब्बों में हुई, जिनमें सिर्फ राख और चंद हड्डियां बची थीं. राजस्थान के अलवर में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर लगी उस आग ने सिर्फ एक कार को नहीं जलाया, बल्कि एक परिवार के हर अरमान को भी खाक कर दिया. 30 अप्रैल 2026 की रात को हादसे का शिकार हुए ये लोग मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के रहने वाले थे.
आज 2 मई को श्योपुर की चैनपुरा बस्ती में जब पांच अर्थियों पर शवों की जगह 'राख के डिब्बे' रखे गए, तो वहां मौजूद हर शख्स की रूह कांप उठी और आसमान भी जैसे उन सिसकियों के बोझ से भारी हो गया. अपनों को आखिरी बार छूना तो दूर, उन्हें देखने तक की हसरत दिल में लिए परिजनों ने नम आंखों से उस राख को एक ही चिता पर सजा दिया. यह विदाई नहीं, काल का वो भयावह मंजर था जिसने पूरे श्योपुर को आंसुओं के समंदर में डुबो दिया.
इनकी हुई थी मौत
राजस्थान के अलवर में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हुए भीषण सड़क हादसे के चैनपुरा बस्ती निवासी पार्वती 56, छोटी 70, शशि 35, संतोष 45 व साक्षी 8 वर्ष और 45 वर्षीय कार चालक विनोद मेहरा की मौत हुई थी. श्योपुर की चैनपुरा बस्ती से माता वैष्णो देवी के दर्शन करने गया परिवार जब वापस लौट रहा था, तभी उनकी कार में अचानक ब्लास्ट के साथ आग लग गई थी. इस हादसे में एक ही परिवार के पांच लोग जिंदा जल गए, जबकि ड्राइवर ने जयपुर में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया.
आग इतनी भीषण थी कि पांचों शव पूरी तरह जलकर राख हो गए. पहचान करना तो दूर, शवों को उठाना भी मुमकिन नहीं था. अलवर पुलिस ने कार से अवशेषों और हड्डियों को इकट्ठा कर कागज के डिब्बों (कार्टून) में भरकर अस्पताल में रखा. जब परिजन शव लेने पहुंचे, तो उन्हें अपनों के शरीर की जगह सिर्फ डिब्बों में भरी राख और हड्डियां मिलीं.
एक ही चिता पर अंतिम संस्कार
गमगीन परिजन उन डिब्बों को लेकर श्योपुर पहुंचे. श्योपुर में जब इन डिब्बों को अर्थियों पर रखा गया, तो देखने वालों की रूह कांप गई. जिस परिवार को खुशी-खुशी विदा किया था, उनकी इस तरह विदाई देख हर आंख नम थी. अंततः, एक ही चिता पर पांचों मृतकों की राख और हड्डियों को रखकर अंतिम संस्कार किया गया. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है.
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