अब मध्य प्रदेश में घरों से निकलने वाले कचरे को सिर्फ गीला और सूखा कचरा कहकर अलग करना काफी नहीं होगा. राज्य सरकार ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 लागू कर दिए हैं, जिसके तहत लोगों को कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर ही संग्रहण वाहनों को देना होगा. सरकार का दावा है कि इससे शहरों और गांवों में कचरा प्रबंधन अधिक व्यवस्थित होगा, रीसाइक्लिंग को बढ़ावा मिलेगा और लैंडफिल साइटों पर बढ़ रहे दबाव को कम करने में मदद मिलेगी.
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 लागू
मध्य प्रदेश सरकार ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं. यह नियम राज्य के सभी शहरी निकायों, सरकारी विभागों और स्थानीय संस्थाओं पर लागू होंगे. सरकार का उद्देश्य कचरे के बेहतर संग्रहण, पृथक्करण, पुनर्चक्रण और सुरक्षित निपटान की व्यवस्था विकसित करना है.
अब चार श्रेणियों में अलग करना होगा कचरा
नए नियमों के अनुसार घरों से निकलने वाले कचरे को अधिकृत कचरा संग्रहण वाहनों को देने से पहले चार भागों में अलग करना अनिवार्य होगा. इनमें गीला कचरा, सूखा कचरा, सैनिटरी कचरा और विशेष देखभाल श्रेणी का कचरा शामिल है. सरकार का मानना है कि स्रोत स्तर पर कचरा अलग होने से उसके निपटान और रीसाइक्लिंग की प्रक्रिया आसान और अधिक प्रभावी होगी.
स्वच्छता अभियान को मिलेगी मजबूती
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश के स्वच्छता अभियान में जनता की भागीदारी हमेशा महत्वपूर्ण रही है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान और लोगों के सहयोग से मध्य प्रदेश ने स्वच्छता के क्षेत्र में कई उपलब्धियां हासिल की हैं. मुख्यमंत्री के अनुसार, नए नियम वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होंगे.
घरों में खाद बनाने को बढ़ावा
राज्य सरकार घरों में जैविक कचरे से खाद बनाने यानी होम कंपोस्टिंग को भी प्रोत्साहित कर रही है. इसके अलावा पुराने कपड़ों, किताबों और अन्य उपयोग योग्य घरेलू सामान के पुनः उपयोग के लिए प्रदेश में रिड्यूस, रीयूज और रीसायकल (आरआरआर) केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं. इससे बेकार समझी जाने वाली वस्तुओं का दोबारा उपयोग संभव हो सकेगा.
सिंगल-यूज प्लास्टिक कम करने की अपील
सरकार ने लोगों से सिंगल-यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने की अपील की है. नागरिकों को कपड़े के थैले, स्टील या अन्य पुनः उपयोग योग्य पानी की बोतलों और पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है. इससे प्लास्टिक कचरे को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
घर-घर कचरा संग्रहण के निर्देश
मुख्यमंत्री ने सभी शहरी निकायों को निर्देश दिए हैं कि घरों, दुकानों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और झुग्गी बस्तियों से नियमित रूप से घर-घर जाकर कचरा संग्रहण सुनिश्चित किया जाए. उन्होंने कहा कि नियमों को लागू करने में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और स्थानीय निकायों को इसकी जिम्मेदारी गंभीरता से निभानी होगी.
'मेरा कचरा, मेरी जिम्मेदारी' पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन नियमों की सफलता केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है. इसके लिए नागरिकों, संस्थाओं और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है. उन्होंने लोगों से 'मेरा कचरा, मेरी जिम्मेदारी' के सिद्धांत को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि इससे आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, स्वस्थ और टिकाऊ मध्य प्रदेश का निर्माण किया जा सकेगा.
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