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This Article is From Apr 07, 2019

EVM-VVPAT केस: चुनाव आयोग के तर्क पर याचिकाकर्ता ने रखा पक्ष, कहा- नतीजों में देरी स्वीकार्य

लोकसभा चुनाव में EVM से VVPAT के 50 फीसदी बढ़ाने को लेकर 21 विपक्षी पार्टियों ने सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल किया.

EVM-VVPAT केस: चुनाव आयोग के तर्क पर याचिकाकर्ता ने रखा पक्ष, कहा- नतीजों में देरी स्वीकार्य
EVM से VVPAT के 50 फीसदी बढ़ाने मामले पर विपक्षी पार्टियों ने SC में दाखिल किया जवाबी हलफनामा
नई दिल्ली:

लोकसभा चुनाव में EVM से VVPAT के 50 फीसदी बढ़ाने को लेकर 21 विपक्षी पार्टियों ने सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल किया. जिसमें कहा गया कि चुनाव के नतीजों के ऐलान में 6 दिनों की देरी  स्वीकार्य है क्योंकि VVPAT पर्ची के 50 फीसदी EVM मतगणना के साथ मिलान करने से चुनाव की निष्पक्षता सुनिश्चित होगी. बता दें कि अगर चुनाव आयोग वीवीपीएटी पर्चियों की गिनती के लिए तैनात कर्मचारियों को बढ़ाता है तो 50 प्रतिशत मतगणना में 2.6 दिनों की देरी होगी, 33 प्रतिशत 1.8 दिनों में परिणाम में देरी होगी और 25 प्रतिशत 1.3 दिनों की देरी होगी, एक विधानसभा क्षेत्र में एक बूथ पर ही औचक मिलान की प्रणाली  चुनाव की निष्पक्षता और ईवीएम की दक्षता को कमजोर करेगी क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर चुनाव आयोग ने 100% ईवीएम में वीवीपीएटी के लिए प्रावधान किया है. अगली सुनवाई 8 अप्रैल को होगी. 

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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस याचिका में EVM के जरिए होने वाले चुनाव में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए 50 फीसदी तक VVPAT पर्चियों के EVM से मिलान की मांग की गई थी. हालांकि चुनाव आयोग ने इसका विरोध किया है. चुनाव आयोग ने कहा है कि वीवीपीएटी स्लिप काउंटिंग की वर्तमान पद्धति में कोई बदलाव संभव नहीं है. पैनल ने यह भी कहा कि अगर वीवीपीएटी की पर्चियों की गिनती 50 फिसदी बढ़ जाती है तो लोकसभा चुनाव परिणाम 6- 9 दिनों की देरी से आएगा. अपने हलफनामे में आयोग ने कहा है कि औसतन, एक मतदान केंद्र की वीवीपीएटी स्लिप काउंट के लिए एक घंटे का समय लगता है. अगर कुल विधानसभा क्षेत्र की संख्या 50% तक बढ़ जाती है तो कम से कम 6 दिन लगेंगे. और कुछ विधानसभाक्षेत्रों में 400 से अधिक बूथ हैं तो वहां मतगणना में 9 दिन लग सकते हैं. 

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आयोग ने यह भी तर्क दिया कि वर्तमान याचिका में "कोई नई या अलग आशंका या शिकायत नहीं उठाई गई है और न ही कोई गंभीर गलती या गंभीर कारण सामने लाया गया है जिसके लिए चुनाव आयोग द्वारा अपनाई गई प्रणाली को फिर से शुरू करने की आवश्यकता हो. चुनाव आयोग ने कहा कि भारत का चुनाव आयोग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है. साथ ही पैनल ने संकेत दिया कि वीवीपीएटी स्लिप काउंटिंग के लिए और अधिक व्यापक प्रशिक्षण दिए जाने की आवश्यकता है और इस अवस्था में संभव नहीं है. 

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आयोग के मुताबिक  भारतीय सांख्यिकी संस्थान की रिपोर्ट बताती है कि कुल 10.35 लाख मशीनों में से 479 EVM और VVPATs के सैंपल वेरिफिकेशन से मिलान  99.9936% तक पहुंच जाएगा. लेकिन आयोग अप्रैल-मई के लोकसभा चुनावों का नमूना सत्यापन 4,125 ईवीएम और वीवीपीएटी को कवर करेगा. आयोग ने कहा कि भारतीय सांख्यिकी संस्थान की रिपोर्ट में यह नमूना आकार का 8.6 गुना है. फ्री एंड फेयर चुनाव और पुख्ता व्यवस्था के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है, जिसमें कहा गया है कि कम से कम 50 फीसदी EVM और VVPAT का मिलान किया जाए. 50 फीसदी ईवीएम और वीवीपैट का औचक निरीक्षण करने की मांग आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित 21 विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में की है. याचिकाकर्ताओं में शरद पवार, केसी वेणुगोपाल, डेरेक ओ ब्राउन, शरद यादव, अखिलेश यादव, सतीश चंद्र मिश्रा, एमके स्टालिन, टीके रंगराजन, मनोज कुमार झा, फारुख अब्दुल्ला, एसएस रेड्डी, कुमार दानिश अली, अजीत सिंह, मोहम्मद बदरुद्दीन अजमल, जीतन राम मांझी, प्रोफेसर अशोक कुमार सिंह आदि शामिल हैं.
 

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