कई बच्चे अपने घर में मम्मी-पापा या दूसरे लोगों के साथ तो खूब बातें करते हैं लेकिन जैसे ही घर से बाहर जाते हैं, किसी से बात करने में झिझकने लगते हैं. सामने वाला व्यक्ति बच्चे से लाख सवाल कर ले लेकिन बच्चा उसका जवाब पता होते हुए भी कुछ बोल नहीं पाता है. ऐसे में पेरेंट्स की टेंशन बढ़ जाती है. माता-पिता के मन में अक्सर ये सवाल रहता है कि वे अपने बच्चे का कॉन्फिडेंस कैसे बढ़ाएं? इसी को लेकर सर्टिफाइड चाइल्ड थेरेपिस्ट और पेरेंटिंग काउंसलर प्रनव ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया है. इस वीडियो में उन्होंने बच्चों की पब्लिक स्पीकिंग को लेकर कुछ जरूरी बातें बताई हैं. आइए जानते हैं इनके बारे में-
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
पेरेंटिंग काउंसलर कहते हैं, अगर बच्चा घर पर अच्छी तरह बात करता है, लेकिन बाहर बात करने में झिझकता है, तो जरूरी नहीं कि उसे बोलने में परेशानी हो. अक्सर पेरेंट्स भी जाने-अनजाने में कुछ आम गलतियां कर जाते हैं. जैसे- जब माता-पिता बच्चे के साथ कहीं बाहर जाते हैं और उन्हें कोई रिश्तेदार या जान-पहचान का कोई व्यक्ति मिल जाता है, तो वे बच्चे को थोड़ा फोर्स करने लगते हैं. जैसे ही सामने वाला व्यक्ति बच्चे से बात करने की कोशिश करता है, ज्यादातर पेरेंट्स बच्चे से कहने लगते हैं, 'अंकल को हाय बोलो', 'राइम सुनाओ' या 'टाटा बोलो'. एक्सपर्ट कहते हैं, इस तरह बच्चे को बार-बार बोलने के लिए मजबूर करने से उसकी झिझक कम होने के बजाय और बढ़ भी सकती है.
तो क्या करना है सही?प्रनव कहते हैं, पब्लिक स्पीकिंग सिखाने के लिए बच्चे को फोर्स करने की जरूरत नहीं है. सबसे पहले बच्चे को थोड़ा सेफ फील कराएं. इसकी शुरुआत घर से करें. आप अपने बच्चे से रोज उसके दिन के बारे में बात कर सकते हैं, बच्चे से पूछ सकते हैं कि आज स्कूल में क्या हुआ? उसने किसी बात पर कैसे रिएक्ट किया? टीचर ने क्या कहा? दोस्तों के साथ क्या हुआ? इस तरह के सवाल करने से बच्चा धीरे-धीरे अपने मन की बातें बताना शुरू करेगा.
इस बात का भी रखें ध्यानएक्सपर्ट कहते हैं, जब बच्चा अपनी बात बता रहा हो तो उसके ग्रामर या भाषा की हर गलती को तुरंत सुधारने से बचें. सही और गलत ग्रामर बच्चा स्कूल में भी सीख रहा होता है. घर पर सबसे जरूरी है कि बच्चा बिना डर अपनी बात कह सके. जब बच्चा बिना डरे अपनी बातें कह पाएगा, तभी उसका कॉन्फिडेंस बढ़ेगा.
इसके साथ ही अगर बच्चा किसी के सामने बात कर रहा है, तो उसे अपने फ्लो से अपनी स्पीड से और अपने तरीके से बात को बोलने दें. बच्चे को बीच-बीच में बार-बार ठीक करने या टोकने से बचें. जब आप बच्चे को मौका देंगे, तो वो धीरे-धीरे खुद अपनी बातें ठीक से कहना सीख पाएगा.
इस तरह छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देकर आप अपने बच्चे का कॉन्फिडेंस बढ़ा सकते हैं.
यहां देखें वीडियो-
यह भी पढ़ें- PTM में बच्चे की टीचर से जरूर पूछें ये 5 सवाल, एक्सपर्ट ने बताया- रिजल्ट से अलग पता चलेंगी कई जरूरी बातें
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं