सर्दियों के मौसम में कई बार ठंड इतनी तीखी और चुभन भरी हो जाती है कि लोग इसे ‘गलन वाली ठंड' कहने लगते हैं. ये सिर्फ कम तापमान की वजह से नहीं, बल्कि ठंडी हवा, नमी, कोहरे और शरीर से तेजी से गर्माहट निकलने के कारण ज्यादा महसूस होती है. ऐसे समय शरीर के अंदर तक ठंड पहुंचने लगती है और कंपकंपी तेज हो जाती है.
साइंस के अनुसार ये शरीर का नेचुरल प्रोटेक्शन सिस्टम है. लेकिन बुजुर्गों, बच्चों और दिल, हड्डियों से जुड़ी बीमारियों वाले लोगों के लिए ये स्थिति ज्यादा जोखिम भरी हो सकती है. इस तरह की ठंड में लापरवाही करना सेहत पर भारी पड़ सकता है. खासकर सुबह और देर रात के समय इसका असर ज्यादा महसूस होता है. इसलिए इस मौसम में शरीर को गर्म रखने और सावधानी बरतने की जरूरत बढ़ जाती है.
गलन वाली ठंड क्या होती है?
गलन वाली ठंड तब होती है जब टेंपरेचर कम हो, हवा में नमी ज्यादा हो और तेज ठंडी हवाएं चल रही हों. इस स्थिति में ठंड सिर्फ स्किन पर महसूस नहीं होती, बल्कि अंदर तक असर डालने लगती है. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, नमी और हवा की स्पीड बढ़ने पर रियल फील टेम्परेचर गिर जाता है. यानी शरीर को तापमान उतना ही ज्यादा ठंडा महसूस होता है. ऐसे में जोड़ों में जकड़न, शरीर में अकड़न और ‘हड्डियों तक ठंड उतरने' जैसा अहसास होने लगता है. यही कारण है कि गलन वाली ठंड सामान्य ठंड की तुलना में ज्यादा असहनीय और तेज महसूस होती है.
क्यों कांपने लगती हैं हड्डियां और कैसे करें बचाव?
जब गलन बढ़ती है तो शरीर खुद को गर्म रखने के लिए एनर्जी लगता है. इसी वजह से मसल्स बार-बार सिकुड़ती और ढीली पड़ती हैं. जिससे कंपकंपी बढ़ जाती है. इस दौरान ब्लड सर्कुलेशन धीमा हो सकता है. हड्डियों और जोड़ों में दर्द बढ़ सकता है. साथ ही सुन्नपन महसूस हो सकता है. हाई बीपी, डायबिटीज और आर्थराइटिस के मरीजों को इसका असर अधिक महसूस होता है.
इस स्थिति बचाव के लिए सिर, कान और पैरों को ढकने की सलाह दी जाती है. साथ ही ऊनी कपड़े पहनें, गुनगुने लिक्विड पिएं और ज्यादा ठंडी हवा के संपर्क से बचें. अगर कंपकंपी लगातार रहे या कमजोरी महसूस हो तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं