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Success Story : स्कूल के बाद चराती थीं भैंस, कई बार UPSC में हुईं फेल, आज हैं जिले की कलेक्टर

तमिलनाडु में टैक्सी ड्राइवर की बेटी वनमति ने आर्थिक तंगी, शादी के दबाव और UPSC में कई असफलताओं के बावजूद हार नहीं मानी. भैंस चराने से लेकर AIR 152 हासिल करने तक का उनका सफर आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुका है.

Success Story : स्कूल के बाद चराती थीं भैंस, कई बार UPSC में हुईं फेल, आज हैं जिले की कलेक्टर
लगातार असफलताओं के बावजूद वनमति ने हार नहीं मानी.

IAS Success Story : भारत में UPSC की परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में एक है. इसमें सफल होने के लिए कड़ी मेहनत, लगन और अनुशासन लगती है, तब जाकर इसमें सफलता हासिल होती है. लोग सालों साल कड़ी मेहनत करते हैं, तब जाकर कहीं सफलता हासिल होती है. कुछ लोग को पहले प्रयास में ही सक्सेस मिल जाती है, तो कुछ कई बार कोशिश के बाद सफलता कदम चूमती है. इस कड़ी में एक कहानी तमिलनाडु की वनमति की है, जिन्होंने आर्थिक तंगी, शादी के दबाब के बीच हार नहीं मानी और कई असफल प्रयासों के बाद साल 2015 में UPSC में 152 रैंक हासिल की. तो चलिए जानते हैं वनमति का आईएएस बनने तक का सफर...

आर्थिक तंगी में बीता बचपन

सी. वनमति का जन्म तमिलनाडु के इरोड जिले के सत्यमंगलम में हुआ था. उनके पिता टैक्सी ड्राइवर थे. परिवार आर्थिक चुनौतियों से जूझता था. वनमति ने बचपन से ही पढ़ाई के साथ घर की जिम्मेदारियां भी संभालीं.

स्कूल से लौटने के बाद वनमति परिवार की भैंसों को चराने जाती थीं. इसके अलावा घरेलू कामों में मदद करती थीं और परिवार की आय बढ़ाने के लिए छोटे-मोटे काम भी करती थीं. सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी.

शादी के दबाव के बीच चुना पढ़ाई का रास्ता

गांव की कई लड़कियों की तरह वनमति पर भी स्कूल की पढ़ाई पूरी होने के बाद शादी का दबाव था. हालांकि उन्होंने आगे पढ़ने का फैसला जिसमें उनके परिवार ने पूरा साथ दिया.

कंप्यूटर एप्लीकेशंस की पढ़ाई

वनमति ने आगे चलकर कंप्यूटर एप्लीकेशंस (Computer Applications) में पोस्टग्रेजुएट डिग्री हासिल की. यही शिक्षा आगे उनकी सिविल सेवा की तैयारी की मजबूत नींव बनी.

टीवी से मिली IAS बनने की मोटिवेशन

वनमति को IAS बनने की मोटिवेशन एक टीवी सीरियल से मिली थी. वह अक्सर ‘गंगा यमुना सरस्वती' नाम का धारावाहिक देखती थीं, जिसमें लीड कैरेक्टर एक IAS अधिकारी था. उस किरदार को देखकर उनके मन में भी एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस में जाने का सपना जगा. उन्होंने सोचा कि अगर एक महिला इस पद तक पहुंच सकती है, तो वह भी अपने लक्ष्य को हासिल कर सकती हैं. 

UPSC के सफर में मिली कई नाकामियां

हालांकि UPSC सफर इतना आसान नहीं था. इस दौराम वनमति को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्होंने नौकरी भी की. बैंकिंग भर्ती परीक्षा पास करने के बाद उन्हें इंडियन ओवरसीज बैंक में असिस्टेंट मैनेजर की नौकरी मिली.

नौकरी मिलने के बाद भी उन्होंने IAS बनने का सपना नहीं छोड़ा. उनका पहला UPSC प्रयास इंटरव्यू तक पहुंचा, लेकिन फाइनल सिलेक्शन में पा नहीं हो सका. इसके बाद भी कई प्रयासों में अलग-अलग चरणों में असफलता मिली.

2015 में मिली सफलता

लगातार असफलताओं के बावजूद वनमति ने हार नहीं मानी. आखिरकार साल 2015 में उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 152 हासिल की और भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के लिए चुनी गईं. उन्हें महाराष्ट्र कैडर आवंटित हुआ.

अब वर्धा की कलेक्टर

IAS बनने के बाद वनमति ने महाराष्ट्र के नंदुरबार, धुले, मुंबई और वर्धा सहित कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर काम किया. उन्होंने आदिवासी कल्याण, ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, जल संरक्षण और डिजिटल गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों में काम किया है.

वर्तमान में वर्धा की जिला कलेक्टर के रूप में वह जल संरक्षण, MSME को बढ़ावा देने और सरकारी परियोजनाओं की निगरानी के लिए डिजिटल सिस्टम लागू करने पर काम कर रही हैं. उनकी डिजिटल मॉनिटरिंग पहल को पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सराहा भी गया है.

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