मानवाधिकार आयोग.
नई दिल्ली:
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जमशेदपुर के महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कालेज अस्पताल में एक महीने में 52 बच्चों की मौत के मामले में झारखंड सरकार से 6 हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है. झारखंड के मुख्य सचिव को जारी हुए नोटिस के मुताबिक आयोग ने मीडिया रिपोर्टों के आधार पर ये पहल की है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 52 बच्चों की मौत 30 दिन के भीतर हुई. अस्पताल के सुपरिटेंडेंट ने मौतों की वजह कुपोषण बताई है. महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कालेज अस्पताल के सुपरिंटेंडेंट भारतेन्दु भूषण ने दावा किया है कि सबसे ज़्यादा मौतें कुपोषण की वजह से हुई हैं. उनके मुताबिक ज्यादातर बच्चे ग्रामीण इलाकों से थे.
फिलहाल इन मौतों की जांच की जा रही है. जांचकर्ता डा. मुर्मु भी कहते हैं कुपोषण के कारण ही सबसे ज़्यादा बच्चों ती मौंतें हुई हैं. वो कहते हैं कि ग्रामीण इलाकों में गर्भवती महिलाएं ज़्यादा जागरूक नहीं होती हैं, पोष्टिक भोजन समय पर नहीं लेती हैं जिसका होने वाले बच्चों की सेहत पर बहुत बुरा इसर पड़ता है.
VIDEO: कहां गई मानवता
इससे पहले गोरखपुर और छत्तीसगढ़ में हुई बच्चों की मौतों से राज्यों के भीतर स्वास्थ्य सेवाओं के मौजूदा बुनियादी ढांचे पर बड़े सवाल उठे थे. अब जमशेदपुर में हुई इन मौतों ने एक बार फिर देश में स्वास्थय सेवाओं का खामियों को उजागर किया है. इसका संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से भी कहा है कि वो राज्यों को इस तरह के मामलों से निपटने के लिए बड़े स्तर पर पहल करने के लिए दिशा-निर्देश जारी करें.
फिलहाल इन मौतों की जांच की जा रही है. जांचकर्ता डा. मुर्मु भी कहते हैं कुपोषण के कारण ही सबसे ज़्यादा बच्चों ती मौंतें हुई हैं. वो कहते हैं कि ग्रामीण इलाकों में गर्भवती महिलाएं ज़्यादा जागरूक नहीं होती हैं, पोष्टिक भोजन समय पर नहीं लेती हैं जिसका होने वाले बच्चों की सेहत पर बहुत बुरा इसर पड़ता है.
VIDEO: कहां गई मानवता
इससे पहले गोरखपुर और छत्तीसगढ़ में हुई बच्चों की मौतों से राज्यों के भीतर स्वास्थ्य सेवाओं के मौजूदा बुनियादी ढांचे पर बड़े सवाल उठे थे. अब जमशेदपुर में हुई इन मौतों ने एक बार फिर देश में स्वास्थय सेवाओं का खामियों को उजागर किया है. इसका संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से भी कहा है कि वो राज्यों को इस तरह के मामलों से निपटने के लिए बड़े स्तर पर पहल करने के लिए दिशा-निर्देश जारी करें.
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