शहीद कमांडेंट प्रमोद कुमार की पत्नी नेे श्रीनगर में सीआरपीएफ की 49वीं बटालियन में झंडा फहराया
- पिछले साल 15 अगस्त को कमांडेंट प्रमोद कुमार ने यहां झंडा फहराया था
- इसके कुछ घंटे बाद आतंकियों के साथ मुठभेड़ में वह शहीद हो गए थे
- इस साल प्रमोद कुमार की पत्नी नेहा ने उसी बटालियन में फहराया तिरंगा
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श्रीनगर:
श्रीनगर में सीआरपीएफ की 49वीं बटालियन में इस साल स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान माहौल गमगीन रहा. सीआरपीएफ के शहीद कमांडेंट प्रमोद कुमार की पत्नी नेहा त्रिपाठी और उनकी नन्ही बेटी ने श्रीनगर में मंगलवार को उसी बटालियन कैंप में तिरंगा फहराया, जहां एक वर्ष पहले प्रमोद ने झंडा फहराया था. इसके कुछ देर बाद ही आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में वह शहीद हो गए थे. प्रमोद कुमार की पत्नी नेहा त्रिपाठी और बेटी आरना ने करन नगर इलाके में 49वें बटालियन के कैंप में झंडा फहराया और झंडे को सलामी दी, जहां कभी उनके पति कमांडेंट थे. उन्होंने कैंप के शहीद स्मारक पर पुष्प चक्र भी अर्पित किया. प्रमोद कुमार को सरकार ने कीर्ति चक्र (मरणोपरांत) से नवाजा है, जो शांति के समय में तीसरा सबसे बड़ा वीरता पदक है.
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पिछले साल 15 अगस्त के दिन प्रमोद कुमार को नौहट्टा में पेट्रोलिंग पार्टी पर आतंकी हमले की जानकारी मिली. वह फौरन एके-47 राइफल लेकर घटनास्थल के लिए रवाना हो गए. पांच घंटे की मुठभेड़ के बाद कमांडेंट प्रमोद शहीद हो गए और नौ अन्य जवान घायल हो गए. प्रमोद के सिर में गोली लगी थी, लेकिन अंतिम सांस लेने से पहले उन्होंने और उनके जवानों ने दो आतंकियों को ढेर कर दिया था.
कमांडेंट प्रमोद की पत्नी नेहा ने कहा, मेरे पति के शहीद होने के बाद मेरे लिए इस जगह पर आने का फैसला करना बहुत कठिन था. लेकिन 49वें बटालियन के जवानों द्वारा आयोजित मेरे पति के श्रद्धांजलि समारोह में शामिल होने के लिए मैं यहां आई. प्रमोद और नेहा मूल रूप से झारखंड के जामताड़ा में पड़ोसी थे. दोनों की शादी 2008 में हुई थी. 2014 में प्रमोद की पोस्टिंग श्रीनगर में हुई थी. उन्हें तीन स्पेशल अवॉर्ड मिल चुके थे और शहीद होने से कुछ दिन पहले ही उनका प्रमोशन हुआ था.
VIDEO: शहादत से पहले फहराया था तिरंगा
प्रमोद कुमार के साथी उन्हें एक ऐसा अफसर के रूप में याद करते हैं, जो हमेशा आगे बढ़कर लीड करते थे. यूनिट के एक अफसर राजमोहन सिंह ने कहा, अगर हमें देश के लिए कुछ करने का मौका मिला तो हम निश्चित रूप से ऐसा करेंगे. हम उसी तरह अपनी ड्यूटी निभाएंगे जिस तरह कमांडेंट प्रमोद कुमार ने निभाई, हम कभी पीछे नहीं हटेंगे.
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पिछले साल 15 अगस्त के दिन प्रमोद कुमार को नौहट्टा में पेट्रोलिंग पार्टी पर आतंकी हमले की जानकारी मिली. वह फौरन एके-47 राइफल लेकर घटनास्थल के लिए रवाना हो गए. पांच घंटे की मुठभेड़ के बाद कमांडेंट प्रमोद शहीद हो गए और नौ अन्य जवान घायल हो गए. प्रमोद के सिर में गोली लगी थी, लेकिन अंतिम सांस लेने से पहले उन्होंने और उनके जवानों ने दो आतंकियों को ढेर कर दिया था.
कमांडेंट प्रमोद की पत्नी नेहा ने कहा, मेरे पति के शहीद होने के बाद मेरे लिए इस जगह पर आने का फैसला करना बहुत कठिन था. लेकिन 49वें बटालियन के जवानों द्वारा आयोजित मेरे पति के श्रद्धांजलि समारोह में शामिल होने के लिए मैं यहां आई. प्रमोद और नेहा मूल रूप से झारखंड के जामताड़ा में पड़ोसी थे. दोनों की शादी 2008 में हुई थी. 2014 में प्रमोद की पोस्टिंग श्रीनगर में हुई थी. उन्हें तीन स्पेशल अवॉर्ड मिल चुके थे और शहीद होने से कुछ दिन पहले ही उनका प्रमोशन हुआ था.
VIDEO: शहादत से पहले फहराया था तिरंगा
प्रमोद कुमार के साथी उन्हें एक ऐसा अफसर के रूप में याद करते हैं, जो हमेशा आगे बढ़कर लीड करते थे. यूनिट के एक अफसर राजमोहन सिंह ने कहा, अगर हमें देश के लिए कुछ करने का मौका मिला तो हम निश्चित रूप से ऐसा करेंगे. हम उसी तरह अपनी ड्यूटी निभाएंगे जिस तरह कमांडेंट प्रमोद कुमार ने निभाई, हम कभी पीछे नहीं हटेंगे.
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