कोटा को इंजीनियरिंग कॉलेज की कोचिंग का केंद्र माना जाता है
कोटा:
राजस्थान के कोटा में कोचिंग संस्थाओं में पढ़ने वाले बच्चों के ख़ुदकुशी करने का सिलसिला थम नहीं रहा है। केरल के कुरावड से आईआईटी की तैयारी करने आए छात्र एनएस अनिल कुमार ने शनिवार को अपने हॉस्टल में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। मौके से पुलिस को एक सुसाइड नोट भी मिला है जिससे शुरूआती जांच में पता चला है कि पढ़ाई के तनाव की वजह से आत्महत्या की गई है। वहीं कोचिंग इंस्टिट्यूट का कहना है कि अनिल पिछले तीन महीनों से नहीं आ रहा था जिसकी सूचना उसके परिजनों को भी दे दी गई थी। फिलहाल पुलिस ने परिजनों को सूचना दे दी है और शव को अस्पताल भेज दिया गया है।
छात्रों की काउंसिलिंग
कोटा में कोचिंग ले रहे छात्रों में खुदकुशी की बढ़ती घटनाएं सबके लिए चिंता का विषय बनती जा रही हैं। इस बारे में कोचिंग संस्थानों ने मिलजुलकर एक हेल्पलाइन चालू करने की बात रखी थी, लेकिन अब तक यह काम हो नहीं पाया है। कुछ महीने पहले मेडिकल की पढ़ाई कर रही एक छात्रा ने भी आत्महत्या कर ली थी। उसके माता-पिता ने कोचिंग संस्थानों से गुहार लगाई कि भले ही पैसा ज्यादा ले लो, लेकिन बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ उनकी काउंसलिंग का भी ध्यान रखो।
प्रशासन भी अब तक ऐसी आत्महत्या को रोकने के लिए काउंसिलिंग को लेकर कोई नियम नहीं बना पाया है। कोटा के पुलिस अधीक्षक सवाई सिंह ने इस बारे में बताया था कि प्रशासन नियम तय कर रहा है। सिंह ने कहा 'प्रशासन एक नीति तय करेगा। कोचिंग सेंटर या संचालकों पर कुछ नियम लागू किए जाएंगे। अगर विद्यार्थी आत्महत्या की तरफ अग्रसर होते हैं तो उन्हें समय पर साइकेट्रिस्ट या मेडिकल एक्सपर्ट की सुविधा मिले।'
छात्रों की काउंसिलिंग
कोटा में कोचिंग ले रहे छात्रों में खुदकुशी की बढ़ती घटनाएं सबके लिए चिंता का विषय बनती जा रही हैं। इस बारे में कोचिंग संस्थानों ने मिलजुलकर एक हेल्पलाइन चालू करने की बात रखी थी, लेकिन अब तक यह काम हो नहीं पाया है। कुछ महीने पहले मेडिकल की पढ़ाई कर रही एक छात्रा ने भी आत्महत्या कर ली थी। उसके माता-पिता ने कोचिंग संस्थानों से गुहार लगाई कि भले ही पैसा ज्यादा ले लो, लेकिन बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ उनकी काउंसलिंग का भी ध्यान रखो।
प्रशासन भी अब तक ऐसी आत्महत्या को रोकने के लिए काउंसिलिंग को लेकर कोई नियम नहीं बना पाया है। कोटा के पुलिस अधीक्षक सवाई सिंह ने इस बारे में बताया था कि प्रशासन नियम तय कर रहा है। सिंह ने कहा 'प्रशासन एक नीति तय करेगा। कोचिंग सेंटर या संचालकों पर कुछ नियम लागू किए जाएंगे। अगर विद्यार्थी आत्महत्या की तरफ अग्रसर होते हैं तो उन्हें समय पर साइकेट्रिस्ट या मेडिकल एक्सपर्ट की सुविधा मिले।'
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