
आर अश्विन (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
साल 2015 खत्म होते होते भारत के रविचन्द्रन अश्विन तमाम क्रिकेट रैंकिग में दुनिया के नंबर 1 गेंदबाज़ और अव्वल नंबर के ऑल-राउंडर बन गए। उनकी गेंदों की विविधता किसी के समझ नहीं आ रही थी। यहां तक कि जब श्रीलंका की टीम एशिया कप से पहले भारत आई तो अश्विन ने एक मैच में अपनी चार ओवर में सिर्फ 8 रन खर्चे और 4 विकेट लिए।
अश्विन का प्रदर्शन इस दौरान बेहद औसत रहा...
उस वक्त अश्विन धोनी और टीम इंडिया के सबसे बडे मैच विनर थे। लेकिन उसके बाद धोनी की कप्तानी में खेले गए 19 मैचों में आर अश्विन सिर्फ़ 9 बार ही अपनी कोटा के 4 ओवर पूरे कर पाए हैं। अश्विन का प्रदर्शन इस दौरान बेहद औसत रहा है और वह सिर्फ 11 विकेट ही ले पाए हैं।
पूरे मैच में सिर्फ़ 1 ही ओवर कराया
हैरानी नहीं कि कप्तान धोनी को उन पर पहले जैसा भरोसा नहीं रहा। बैंगलोर के खिलाफ़ पिछले मुकाबले में तो धोनी ने उनसे पूरे मैच में सिर्फ़ 1 ही ओवर कराया। उस ओवर में उन्होंने सिर्फ 7 रन खर्चे लेकिन दूसरा ओवर नहीं मिला। इस पूरे सीज़न अश्विन ने 10 मैचों में 30 ओवर फेंके हैं, विकेट लिए हैं सिर्फ़ तीन जो बताता है कि उनकी गेंदों का जादू अब फीका होता जा रहा है।
मैच के बाद टीम के दूसरे स्पिन झंपा ने बयान दिया कि जब दो सेट दाएं हाथ के बल्लेबाज़ क्रीज़ पर होते हैं तो माही अश्विन का इतना ज़्यादा इस्तेमाल नही करते। मगर ये अश्विन पर कप्तान का गिरता हुआ भरोसा ही है कि उन्हें अब दाएं-हाथ के बल्लेबाज़ों के खिलाफ़ नहीं उतारा जाता। अश्विन के लिए ये एक बड़ी चुनौती है और देखना है कि वह आगे इससे कैसे वापसी करते हैं?
अश्विन का प्रदर्शन इस दौरान बेहद औसत रहा...
उस वक्त अश्विन धोनी और टीम इंडिया के सबसे बडे मैच विनर थे। लेकिन उसके बाद धोनी की कप्तानी में खेले गए 19 मैचों में आर अश्विन सिर्फ़ 9 बार ही अपनी कोटा के 4 ओवर पूरे कर पाए हैं। अश्विन का प्रदर्शन इस दौरान बेहद औसत रहा है और वह सिर्फ 11 विकेट ही ले पाए हैं।
पूरे मैच में सिर्फ़ 1 ही ओवर कराया
हैरानी नहीं कि कप्तान धोनी को उन पर पहले जैसा भरोसा नहीं रहा। बैंगलोर के खिलाफ़ पिछले मुकाबले में तो धोनी ने उनसे पूरे मैच में सिर्फ़ 1 ही ओवर कराया। उस ओवर में उन्होंने सिर्फ 7 रन खर्चे लेकिन दूसरा ओवर नहीं मिला। इस पूरे सीज़न अश्विन ने 10 मैचों में 30 ओवर फेंके हैं, विकेट लिए हैं सिर्फ़ तीन जो बताता है कि उनकी गेंदों का जादू अब फीका होता जा रहा है।
मैच के बाद टीम के दूसरे स्पिन झंपा ने बयान दिया कि जब दो सेट दाएं हाथ के बल्लेबाज़ क्रीज़ पर होते हैं तो माही अश्विन का इतना ज़्यादा इस्तेमाल नही करते। मगर ये अश्विन पर कप्तान का गिरता हुआ भरोसा ही है कि उन्हें अब दाएं-हाथ के बल्लेबाज़ों के खिलाफ़ नहीं उतारा जाता। अश्विन के लिए ये एक बड़ी चुनौती है और देखना है कि वह आगे इससे कैसे वापसी करते हैं?