- महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन बिल को पारित कराने के लिए दो तिहाई बहुमत जरूरी है.
- विपक्षी दलों में कांग्रेस, सपा, TMC, DMK, शिवसेना UBT और NCP के लगभग 200 सांसद बिल के खिलाफ हैं.
- कांग्रेस ने सहयोगी दलों के सांसदों को वोटिंग में मौजूद रहने के लिए कहा है.
महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन बिल को जब गुरुवार को लोकसभा में पेश किया गया तभी साफ हो गया था कि सरकार के पास इसे पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत नहीं है. तब विरोध में 185 वोट पड़े. वोटिंग से ठीक पहले विपक्ष के सूत्र दावा कर रहे थे विरोध में वोट की संख्या 200 तक जा सकती है. यानी किसी भी स्थिति में सरकार संविधान संशोधन विधेयक को पारित नहीं करवा सकती.
कितनी है विपक्षी दलों की ताकत
सूत्रों के मुताबिक यदि बिल पर वोटिंग होती है तो वोटिंग में कांग्रेस के 95, समाजवादी पार्टी के 37, तृणमूल कांग्रेस के 20, डीएमके के 20, शिवसेना यूबीटी के 9 और एनसीपी शरद पवार के 5 सांसद खिलाफ वोट करेंगे. यह आंकड़ा 186 हो जाता है. इसके अलावा आम आदमी पार्टी, वाम दलों और अन्य छोटे दलों को मिलाकर करीब 200+ वोट खिलाफ में पड़ने की संभावना है.

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रिस्क नहीं लेना चाहते विपक्षी दल
प्रस्तावित परिसीमन के वजह से इस बिल का विरोध कर रहा विपक्षी गठबंधन कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहता. यही वजह है कि बिल पर वोटिंग के दौरान कांग्रेस ने सहयोगी दलों के सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी अपने वरिष्ठ नेताओं को दी है.
सहयोगी दलों के संपर्क में कांग्रेस के दिग्गज नेता

केसी वेणुगोपाल, मणिकम टैगोर, पी चिदंबरम जैसे वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है कि वोटिंग के समय आज इंडिया गठबंधन के सभी सांसद मौजूद रहें. इससे पहले केसी वेणुगोपाल को डीएमके, जयराम रमेश को टीएमसी जैसे दलों से तालमेल की जिम्मेदारी दी गई थी. लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी खुद स्टालिन और अखिलेश यादव के साथ लगातार संपर्क में बने रहे.
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क्यों संभव नहीं है इस बाल का पारित होना
संविधान संशोधन विधेयक पारित करने के लिए 543 सदस्यों की लोकसभा में दो तिहाई बहुमत के लिए 362 वोट की जरूरत होती है. जबकि इसे रोकने के लिए 182 वोटों की जरूरत होगी. कुछ सीटें खाली होने और कुछ सांसदों की अनुपस्थिति के कारण यह आंकड़ा कुछ कम हो सकता है. लेकिन यदि विपक्ष के पास पहले ही 185 से ज़्यादा वोटों की गिनती है तो फिर महिला आरक्षण-परिसीमन बिल का पारित होना संभव नहीं है.
BJD ने दिया विपक्ष का साथ
विपक्षी गठबंधन के लिए उत्साहित करने वाली बात यह है कि पहली बार बीजू जनता दल उनके साथ आई है. हालांकि बीजेडी के पास लोकसभा में कोई सांसद नहीं है लेकिन राज्यसभा में BJD नेता मानस रंजन शुक्रवार सुबह मल्लिकार्जुन खरगे के कमरे में हुई बैठक में शामिल हुए.
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