जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि ने रविवार 31 मई को देश के तीसरे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के रूप में कार्यभार संभाल लिया. पदभार ग्रहण करने के बाद उन्हें साउथ ब्लॉक में औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. वह गढ़वाल रेजिमेंट के वरिष्ठ अधिकारी हैं और उन्होंने जनरल अनिल चौहान का स्थान लिया है, जिन्होंने 30 मई को अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद सेवानिवृत्ति ली. कार्यभार संभालने के बाद जनरल सुब्रमणि ने स्पष्ट किया कि उनके नेतृत्व में भारतीय सशस्त्र बलों का प्रमुख फोकस ‘जय' यानी जॉइंटनेस, आत्मनिर्भरता और नवाचार पर रहेगा.
कठिन परिस्थितियों में शानदार काम
40 सालों से अधिक के अपने गौरवपूर्ण करियर में लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रामनी ने विभिन्न संघर्ष क्षेत्रों और भौगोलिक परिस्थितियों में सेवा दी है तथा अनेक कमान, स्टाफ और प्रशिक्षण संबंधी दायित्व निभाए. उन्होंने ऑपरेशन राइनो के अंतर्गत असम में उग्रवाद-रोधी अभियानों के दौरान 16 गढ़वाल राइफल्स की कमान संभाली. इसके अतिरिक्त उन्होंने जम्मू-कश्मीर में 168 इन्फैंट्री ब्रिगेड तथा चुनौतीपूर्ण परिचालन परिस्थितियों में केंद्रीय सेक्टर में 17 माउंटेन डिवीजन की कमान भी संभाली. उन्हें भारतीय सेना की पश्चिमी मोर्चे पर तैनात प्रमुख स्ट्राइक कोर ‘II कोर' की कमान संभालने का गौरव भी प्राप्त है.
40 साल का शानदार करियर
जनरल सुब्रमणि ने 40 वर्ष से अधिक के अपने शानदार करियर में विभिन्न तरह के संघर्ष क्षेत्रों और भौगोलिक परिस्थितियों में सेवा दी तथा कमान, स्टाफ और प्रशिक्षण संबंधी कई पदों पर कार्य किया.
- जनरल सुब्रमणि ने एक जुलाई 2024 से 31 जुलाई 2025 तक थलसेना के उप प्रमुख के रूप में सेवा दी.
- मार्च 2023 से जून 2024 तक मध्य कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ रहे.
- वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और भारतीय सैन्य अकादमी के स्नातक हैं.
- जनरल सुब्रमणि ने 14 दिसंबर, 1985 को गढ़वाल राइफल्स की आठवीं बटालियन में शामिल किया गया था.
- ‘ऑपरेशन राइनो' के तहत असम में उग्रवाद-रोधी अभियानों में 16 गढ़वाल राइफल्स, जम्मू कश्मीर में 168 इन्फैंट्री ब्रिगेड और चुनौतीपूर्ण अभियानगत माहौल में मध्य क्षेत्र में 17 माउंटेन डिवीजन की कमान संभाली.
- पश्चिमी मोर्चे पर भारतीय सेना की एक प्रमुख स्ट्राइक कोर सहित दो कोर की कमान संभालकर भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई.
- जनरल सुब्रमणि की स्टाफ और प्रशिक्षण संबंधी नियुक्तियों में एक माउंटेन ब्रिगेड के ब्रिगेड मेजर, कजाखस्तान में रक्षा अताशे, सैन्य सचिव शाखा में सहायक सैन्य सचिव, जम्मू कश्मीर में राष्ट्रीय राइफल्स सेक्टर के उप कमांडर और रक्षा मंत्रालय (थलसेना) के एकीकृत मुख्यालय में सैन्य खुफिया के उप महानिदेशक के पद शामिल हैं.
- जनरल सुब्रमणि को उनकी विशिष्ट सेवा के लिए परम विशिष्ट सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक, सेना पदक और विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया है.
कौन हैं NS राजा सुब्रमणि, जो बनेंगे भारत के अगले CDS
लेफ्टिनेंट जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि भारतीय थल सेना के बेहद सीनियर ऑफिसर हैं. 1 सितंबर 2025 से अब तक राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार के पद पर कार्यरत थे. इससे पहले वे 1 जुलाई 2024 से 31 जुलाई 2025 तक थल सेना के उप-प्रमुख (Vice Chief of the Army Staff) रहे, और मार्च 2023 से जून 2024 तक मध्य कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ थे. उनकी गिनती तेज-तर्रार अधिकारियों में की जाती है. एनएस राजा सुब्रमणि राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और भारतीय सैन्य अकादमी के स्नातक हैं. उन्हें 14 दिसंबर, 1985 को गढ़वाल राइफल्स की 8वीं बटालियन में कमीशन दिया गया था. वे जॉइंट सर्विसेज कमांड स्टाफ कॉलेज, ब्रैक्नेल (UK) और राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज, नई दिल्ली के पूर्व छात्र हैं. उनके पास किंग्ज़ कॉलेज लंदन से मास्टर ऑफ आर्ट्स की डिग्री और मद्रास विश्वविद्यालय से डिफेंस स्टडीज में M.Phil की डिग्री है. जनरल ऑफिसर को पश्चिमी और उत्तरी, दोनों सीमाओं पर ऑपरेशनल स्थितियों की गहरी जानकारी और गहन समझ है. जनरल एनएस सुब्रमणि को परम विशिष्ट सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक, सेना पदक और विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया है.
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2020 में केंद्र की मोदी सरकार ने तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने के लिए चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (CDS) का पद सृजित किया था. 1 जनवरी 2020 को यह पद सृजित होने के बाद जनरल बिपिन रावत भारत के पहले सीडीएस बने थे. सीडीएस के पद पर जनरल बिपिन रावत का कार्यकाल 1 जनवरी 2020 से 8 दिसंबर 2021 तक रहा था. 8 दिसंबर को एक दुर्भाग्यपूर्ण विमान हादसे में जनरल बिपिन रावत का निधन हो गया था.
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