
देहरादून:
राहतकर्मियों को शनिवार को उत्तराखंड की विनाशलीला का सबसे ज्यादा असर झेलने वाले केदारनाथ मंदिर परिसर से 123 शव मिले, जिसे मिलाकर इस पर्वतीय हादसे में मरने वालों की तादाद बढ़कर 680 हो गई।
मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने संवाददाताओं को बताया, केदारनाथ को अब तीर्थयात्रियों से पूरी तरह से खाली करा लिया गया है और अब बद्रीनाथ से तीर्थयात्रियों को निकाला जाएगा, जहां तकरीबन 8,000 लोग फंसे हुए हैं। राज्य में बारिश और बाढ़ के इस कहर से बहुत बड़े नुकसान की बात स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मरने वालों का आंकड़ा एक हजार तक हो सकता है।
राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि केदारनाथ परिसर से 123 शव मिले हैं। विशेषज्ञों का एक दल पूरे इलाके में फैले शवों को एकत्र करने के लिए वहां गया था। अधिकारी, जो अपना नाम नहीं बताना चाहते थे, ने कहा कि अगले एक दो दिन में कुछ और शव निकल सकते हैं, जब इलाके में पड़ा कीचड़ और मलबा साफ होगा।
बहुगुणा ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए यथासंभव प्रयास कर रही हैं। राहत अभियानों में 44 हेलीकॉप्टर और बड़ी संख्या में सेना और अर्धसैनिक बलों के जवानों को लगाया गया है।
बहुगुणा ने कहा कि केदारनाथ मंदिर को फिर से खोलना सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है और इसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की सिफारिशों के अनुरूप इसका पुराना स्वरूप प्रदान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि गौरीकुंड के निकट जंगलचट्टी इलाके में देखे गए एक हजार तीर्थयात्रियों में से 400 को सुरक्षित निकाल लिया गया है। करीब 600 तीर्थयात्री अभी भी वहीं फंसे हुए हैं, उन्हें वहां से निकालने तक खाने का पर्याप्त सामान और दवाएं मुहैया कराई जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, अब हमारा ध्यान बद्रीनाथ पर है, जहां से शनिवार को 500 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। वहां फंसे लोगों की तादाद 7,000 से 8,000 के बीच है।
मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने संवाददाताओं को बताया, केदारनाथ को अब तीर्थयात्रियों से पूरी तरह से खाली करा लिया गया है और अब बद्रीनाथ से तीर्थयात्रियों को निकाला जाएगा, जहां तकरीबन 8,000 लोग फंसे हुए हैं। राज्य में बारिश और बाढ़ के इस कहर से बहुत बड़े नुकसान की बात स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मरने वालों का आंकड़ा एक हजार तक हो सकता है।
राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि केदारनाथ परिसर से 123 शव मिले हैं। विशेषज्ञों का एक दल पूरे इलाके में फैले शवों को एकत्र करने के लिए वहां गया था। अधिकारी, जो अपना नाम नहीं बताना चाहते थे, ने कहा कि अगले एक दो दिन में कुछ और शव निकल सकते हैं, जब इलाके में पड़ा कीचड़ और मलबा साफ होगा।
बहुगुणा ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए यथासंभव प्रयास कर रही हैं। राहत अभियानों में 44 हेलीकॉप्टर और बड़ी संख्या में सेना और अर्धसैनिक बलों के जवानों को लगाया गया है।
बहुगुणा ने कहा कि केदारनाथ मंदिर को फिर से खोलना सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है और इसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की सिफारिशों के अनुरूप इसका पुराना स्वरूप प्रदान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि गौरीकुंड के निकट जंगलचट्टी इलाके में देखे गए एक हजार तीर्थयात्रियों में से 400 को सुरक्षित निकाल लिया गया है। करीब 600 तीर्थयात्री अभी भी वहीं फंसे हुए हैं, उन्हें वहां से निकालने तक खाने का पर्याप्त सामान और दवाएं मुहैया कराई जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, अब हमारा ध्यान बद्रीनाथ पर है, जहां से शनिवार को 500 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। वहां फंसे लोगों की तादाद 7,000 से 8,000 के बीच है।
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं
उत्तराखंड बाढ़, उत्तराखंड बारिश, उत्तराखंड आपदा, बचाव अभियान, केदारनाथ धाम, केदारनाथ मंदिर, Uttarakhand Flood, Uttarakhand Rain, Kedarnath Temple