आठ सीट वाले वाहनों में छह एयरबैग अनिवार्य होंगे : नितिन गडकरी

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने सोमवार को कहा कि सरकार आठ सीट वाले वाहनों (Eight seat vehicles) में छह एयरबैग (Six airbags) को अनिवार्य बनाएगी.

आठ सीट वाले वाहनों में छह एयरबैग अनिवार्य होंगे : नितिन गडकरी

इस पहल का मकसद सहयोग और नवोन्मेष के जरिये सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाना है.

मुंबई :

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने सोमवार को कहा कि सरकार आठ सीट वाले वाहनों (Eight seat vehicles) में छह एयरबैग (Six airbags) को अनिवार्य बनाएगी. इसके तहत वाहन विनिर्माता गाड़ियों को और सुरक्षित बनाने के लिये आठ यात्रियों को ले जाने वाले वाहनों में छह एयरबैग उपलब्ध कराएंगे. ‘इंटेल इंडिया सेफ्टी पॉयोनियर्स कॉन्फ्रेन्स' 2022 को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि हर साल देश में होने वाले पांच लाख सड़क हादसों में करीब 1.5 लाख लोगों की जान जाती है.

मंत्री ने कहा, ‘‘हमने मोटर वाहनों में कम-से-कम छह एयरबैग उपलब्ध कराने को अनिवार्य करने का निर्णय किया है...हम लोगों के जीवन को बचाना चाहते हैं.'' उन्होंने कहा, ‘‘हमें इसके लिये वाहन उद्योग समेत सभी पक्षों से सहयोग की जरूरत है.''इंटेल ने भारत में सड़क सुरक्षा बढ़ाने के अपने लक्ष्य के तहत उद्योग, शिक्षा जगत, और अग्रणी सरकारी संगठनों को एक साथ लाने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में इस सम्मेलन का आयोजन किया. इस पहल का मकसद सहयोग और नवोन्मेष के जरिये सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाना है.

इंटेल के समाधानों में एडवांस्ड टेलीमेटिक्स भी है, जिसमें वाहन के स्वास्थ्य एवं फ्यूल एनालिटिक्स के साथ अद्वितीय ड्राईवर स्कोरिंग और रेटिंग मॉड्यूल भी शामिल है. इससे फ्लीट मालिकों को दुर्घटनाओं और डाउनटाईम का जोखिम कम करने में काफी मदद मिल सकती है, और लक्षित इन्सेंटिवाईज़ेशन एवं रिवार्ड्स प्रोग्राम द्वारा ड्राईविंग की अच्छी विधियों को प्रोत्साहन मिल सकता है. इस समाधान का एक केंद्रीय पहलू ड्राईवर की कोचिंग है, जो कमर्शियल फ्लीट के लिए व्यक्तिगत कोचिंग प्रदान करने के लिए 15 अलग-अलग इनपुट एक्टिवेट करती है. इस कमर्शियल फ्लीट को हर बार दुर्घटना होने पर 25 दिनों तक के कार्यदिवस का नुकसान होता है.

भारत में सड़क दुर्घटनाओं की दर दुनिया में सबसे ज्यादा है. यहां पर दुनिया के 1 प्रतिशत वाहन हैं, लेकिन सड़क पर होने वाली मौतें 11 प्रतिशत हैं. भारतीय सड़कों पर हर एक मिनट में एक दुर्घटना होती है और हर घंटे 17 मौतें हो जाती हैं. 10 दुर्घटनाओं में से छः दुर्घटनाओं में कमर्शियल फ्लीट शामिल होती है, जिसे ड्राईवर द्वारा समय पर कदम उठाकर रोका जा सकता है. कमर्शियल फ्लीट उद्योग को दुर्घटनाओं और फ्लीट खराब होने के कारण हर साल 48,000 करोड़ रु. तक का एफिशियंसी नुकसान होता है.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)