यह ख़बर 21 दिसंबर, 2014 को प्रकाशित हुई थी

अंगीठी की आंच बनी जानलेवा, चार बच्चों समेत सात की मौत

नई दिल्ली:

अंगीठी की आंच सर्दियों की ठिठुरन में राहत तो देती है, लेकिन कई बार जानलेवा भी बन जाती है। दिल्ली के हौजखास इलाके में कारोबारी आर. के. ओबेरॉय की कोठी में शनिवार देर रात ऐसा ही हुआ। देर रात तक हुई पार्टी के बाद घर के चार नौकर राजेश, मुन्ना, संतोष और उदय कोठी में पीछे बने सर्वेंट क्वार्टर में तसले में आग जलाकर सो गए। रविवार को जब दरवाजा खोला गया तो उदय को छोड़कर बाकी सब दम तोड़ चुके थे। वहीं उदय की हालत भी गंभीर बनी हुई है।

मृतक राजेश के रिश्तेदार महादेव ने बताया कि कोठी के मालिक उन्हें ठीक से जबाब नहीं दे रहे हैं। वहीं दक्षिणी दिल्ली के डीसीपी प्रेमनाथ का कहना है कि सभी नौकर एक छोटे से कमरे में तसले में आग जलाकर सो गए थे और कमरा अंदर से बंद था। शुरुआती जांच में मौत का कारण दम घुटना लग रहा है।
 
उधर एक ऐसी ही एक घटना यूपी के बिजनौर में घटी, जहां सर्दी के सितम से बचने के लिए अब्बास अपने परिवार के साथ कमरा बंद कर सो गया, लेकिन गर्मी के लिए अंगीठी भी जला ली। बंद कमरे में अंगीठी से निकली गैस ने उसके 4 बच्चों की जान ले ली, जबकि अब्बास, उसकी पत्नी शाहना और एक बच्चे की हालत गंभीर बनी हुई है।
 
जानकारों के मुताबिक सर्दियों की रात ऐसी घटनाएं ज़्यादा होती हैं। ठंड से बचने के लिए लोग बंद कमरों में अंगीठी जलाकर सो जाते हैं और फिर अंगीठी से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस नींद में ही बेहोश कर देती है और नर्वस सिस्टम पर गहरा असर डालती है। इसी बेहोशी में ऑक्सीजन की कमी से दम घुटकर मौत हो जाती है। यही वजह है कि कार्बन मोनोऑक्साइड को साइलेंट किलर भी कहा जाता है।

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दिल्ली और बिजनौर की घटनाएं लापरवाही से हुई मौत दिख रही हैं। हांलाकि दोनों ही मामलों में पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।