- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स समिट में UNSC में की सुधार की बात उठाई थी.
- पीएम मोदी की बात संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने समर्थन किया है.
- उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार की बुनियादी जरूरत है.
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के जरिए भारत की कूटनीति एक बार फिर सफल दिखी है. समिट की शुरुआत में स्वागत संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा था कि 'UNSC में सुधार अब टाला नहीं जा सकता.'पीएम मोदी ने कहा था कि यूएन सिक्योरिटी काउंसिल में रिफॉर्म अब और टाला नहीं जा सकता है, निश्चित समयसीमा में ठोस नतीजों से इसे जोड़ना होगा. पीएम मोदी की इस बात का संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस बात का समर्थन किया है. उनका कहना है कि परिषद और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार की बुनियादी जरूरत है. जिसे भारत के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है.
यूएन महासचिव ने किया समर्थन
यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के मुख्य प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने एक प्रेस ब्रीफिंग में पीएम मोदी के बयान पर सहमति जताई है. उनका भी कहना है 'सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना आज की जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाती है. क्योंकि सुरक्षा परिषद की वर्तमान संरचना 1945 की दुनिया को दर्शाती है, न कि आज की वैश्विक वास्तविकता को. यह स्पष्ट है कि परिषद को और अधिक प्रतिनिधित्व वाली संस्था बनाने की जरूरत है, जिसमें विकासशील देशों और खासकर अफ्रीका की आवाज को सही जगह मिले.'
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2026 की स्थिति दिखना चाहिए
अगर आप परिषद के मौजूदा गठन को देखें जिसमें 5 स्थायी सदस्य हैं तो यह अब 21वीं सदी की तस्वीर पेश नहीं करता है. चाहे सुरक्षा परिषद हो, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान हों या अन्य सभी प्रकार के अंतरराष्ट्रीय संस्थान उन्हें 1945 के बजाय 2026 की स्थिति को दिखाना चाहिए. अब समय आ गया है कि हम इस संगठन को दुनिया की वास्तविकताओं के अनुरूप ढालें ताकि यह वास्तव में सभी का प्रतिनिधित्व करने वाला और अधिक प्रभावी बन सके.'
पीएम मोदी को दी बधाई
स्टीफन दुजारिक ने कहा 'भारत की BRICS प्रेसीडेंसी और नई दिल्ली डिक्लेरेशन में अहम मुद्दों पर चर्चा हुई है. सेक्रेटरी जनरल का मानना है कि भारत को एक ब्रिज बनाने वाले के तौर पर, लड़ने वाले पक्षों को बातचीत करने और शांतिपूर्ण समझौते तक पहुंचने में मदद करने के तरीके के तौर पर बड़ी भूमिका निभानी है. दुजारिक ने ग्रुप में भारत की लीडरशिप के लिए पीएम मोदी को बधाई दी और कहा कि जॉइंट डिक्लेरेशन (संयुक्त बयान) को अपनाना भारत की प्रेसीडेंसी का क्रेडिट है. दुजारिक ने आगे कहा कि बहुपक्षीय व्यवस्था को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए इन सुधारों को गति देना अनिवार्य हो चुका है. उन्होंने माना कि वैश्विक मंच पर भारत जैसे बड़े और प्रभाव रखने वाले देशों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
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ग्लोबल साउथ की हिस्सेदारी होनी चाहिए: पीएम मोदी
दरअसल, कल पीएम मोदी ने भी यही बात करते हुए कहा था ' मौजूदा वैश्विक शासन ढांचा एक 'पिरामिड' जैसा है, जिसमें सत्ता और निर्णय लेने की शक्ति शीर्ष पर केंद्रित है, जबकि उन फैसलों से प्रभावित होने वाले देशों की उन्हें आकार देने की क्षमता सीमित है. पीएम मोदी ने कहा था कि ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों में सबसे आगे रहता है लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में पिछली पंक्ति में रहता है. उन्होंने विशेषाधिकार के पिरामिड को साझेदारी के मंच में बदलने का प्रस्ताव दिया, जहां हर देश की अपनी आवाज और हिस्सेदारी हो. ऐसे में यूएन के महासचिव का पीएम मोदी की बात को सीधा समर्थन देना अहम माना जा रहा है.
पीएम मोदी की बात का यूएन प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक की तरफ से समर्थन मिलना अहम माना जा रहा है. उनके समर्थन से यह माना जा सकता है कि दुनिया अब भारत के तर्कों से सहमति जता रहा है.
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