
नई दिल्ली:
कांग्रेस ने शनिवार को कहा कि 'पनामा पेपर्स' खुलासे की सरकारी एजेंसियों से की जाने वाली किसी भी जांच की कोई विश्वसनीयता नहीं है। पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी वाले विशेष जांच दल (एसआईटी) से इसकी जांच कराने की मांग दोहराई है। पार्टी उन खबरों पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रही थी, जिनमें कहा गया है कि प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे को एसआईटी को नहीं सौंपने को कहा है।
अंतरराष्ट्रीय खोजी पत्रकार संघ (आईसीआईजे) द्वारा किए गए इस वैश्विक खुलासे को 'पनामा पेपर्स' नाम दिया गया है। इसमें विदेश में निवेश करने वाले 500 से अधिक भारतीयों के भी नाम हैं। मोदी ने इनकी कई एजेंसियों की एक टीम बनाकर जांच के आदेश दिए हैं।
कांग्रेस ने मांग की है कि जिनके भी नाम 'पनामा पेपर्स' में अब तक आए हैं, उन सबके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी जांच करे। कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा, 'कर चोरी करके जिन लोगों ने अपनी काली कमाई को पनामा में निवेश किया है, वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्तमंत्री अरुण जेटली के शुभचिंतक और दोस्त बताए जाते हैं। इसलिए सरकारी एजेंसियों की किसी भी जांच की कोई विश्वसनीयता नहीं है। हम 'पनामा पेपर्स' की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी जांच की मांग करते हैं।'
मीडिया रपटों के मुताबिक, मोदी ने पनामा रपट के खुलासे के 15 दिनों के अंदर पहली रपट देने को कहा है। वह यह भी चाहते हैं कि जांच जल्दी हो और मामले को एसआईटी के हवाले नहीं किया जाए।
जेटली ने कहा है कि कई एजेंसियों वाला एक जांच दल तैयार किया गया है। इसमें केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड की वित्तीय खुफिया इकाई, उसकी कर शोध इकाई और भारतीय रिजर्व बैंक के अधिकारी भी शामिल किए गए हैं। इस समूह की पहली बैठक सात अप्रैल को हुई थी।
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है)
अंतरराष्ट्रीय खोजी पत्रकार संघ (आईसीआईजे) द्वारा किए गए इस वैश्विक खुलासे को 'पनामा पेपर्स' नाम दिया गया है। इसमें विदेश में निवेश करने वाले 500 से अधिक भारतीयों के भी नाम हैं। मोदी ने इनकी कई एजेंसियों की एक टीम बनाकर जांच के आदेश दिए हैं।
कांग्रेस ने मांग की है कि जिनके भी नाम 'पनामा पेपर्स' में अब तक आए हैं, उन सबके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी जांच करे। कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा, 'कर चोरी करके जिन लोगों ने अपनी काली कमाई को पनामा में निवेश किया है, वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्तमंत्री अरुण जेटली के शुभचिंतक और दोस्त बताए जाते हैं। इसलिए सरकारी एजेंसियों की किसी भी जांच की कोई विश्वसनीयता नहीं है। हम 'पनामा पेपर्स' की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी जांच की मांग करते हैं।'
मीडिया रपटों के मुताबिक, मोदी ने पनामा रपट के खुलासे के 15 दिनों के अंदर पहली रपट देने को कहा है। वह यह भी चाहते हैं कि जांच जल्दी हो और मामले को एसआईटी के हवाले नहीं किया जाए।
जेटली ने कहा है कि कई एजेंसियों वाला एक जांच दल तैयार किया गया है। इसमें केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड की वित्तीय खुफिया इकाई, उसकी कर शोध इकाई और भारतीय रिजर्व बैंक के अधिकारी भी शामिल किए गए हैं। इस समूह की पहली बैठक सात अप्रैल को हुई थी।
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है)
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