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This Article is From Jan 01, 2016

झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबरदास अखबार में विज्ञापन को लेकर विवादों में

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झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबरदास अखबार में विज्ञापन को लेकर विवादों में
सीएम रघुबर दास (फाइल फोटो)
पटना: क्या झारखंड सरकार को नियम-कानून का ज्ञान नहीं है या मुख्यमंत्री रघुबर दास ने यह तय कर लिया है कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन करेंगे। यह बात इन दिनों झारखंड की राजधानी रांची में चर्चा का विषय है। सरकार की पहली वर्षगांठ पर झारखंड और बिहार के हर अखबार में रघुबरदास ने दो पेज का विज्ञापन दिया है। इसमें पहला पन्ना एक साक्षात्कार की शक्ल में दिया गया और उसमें उनकी तीन तस्वीरें लगी हैं। निश्चित रूप से सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश में जिसमें किसी भी सरकारी विज्ञापन में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और न्यायाधीश के अलावा किसी की तस्वीर लगाने पर पाबंदी है, उसे रघुबरदास सरकार ने इग्नोर किया है।

और जब से यह विज्ञापन आया है, अब विपक्षी दलों को झारखंड में बैठे-बिठाये एक मुद्दा मिल गया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य का कहना है कि जल्द उनकी पार्टी इस विज्ञापन को मुख्य न्यायाधीश के संज्ञान में लाएगी और उनसे उन्हीं के आदेशों का मखौल उड़ाने के लिए जो भी उचित कारवाई हो करने के लिए आग्रह करेगी। साथ ही इस विज्ञापन पर जितना भी खर्चा आया हो वह सरकार सीएम रघुबर दास के वेतन से वसूला जाए इसके लिए भी पार्टी कोर्ट से अपील करेगी।

हालांकि इस मुद्दे पर बीजेपी में फिलहाल कोई कुछ नहीं बोल रहा, लेकिन राज्य सूचना जनसंपर्क विभाग के अधिकारी मानते हैं कि गलती तो हुई है, लेकिन बात मुख्यमंत्री की हो तो आखिर कोई कैसे बोले कि उनकी तस्वीर के साथ विज्ञापन गलत है।
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