
पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ के साथ पीएम मोदी (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
पाकिस्तान कश्मीर के हालात को हर तरह से भुनाने की कोशिश कर रहा है। यूएन की मानवाधिकार समिति की बैठक में मामला उठाने के बाद अब वह कश्मीर पर संसद का संयुक्त सत्र बुलाने और काला दिवस मनाने की तैयारी में है। भारत ने इस पर कड़ा एतराज जताया है।
शुक्रवार को लाहौर के गर्वनर हाउस में केन्द्रीय कैबिनेट की एक ख़ास मीटिंग बुलाई गई जिसमें कश्मीर के हालात पर चर्चा की गई। मौक़े पर प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने एक बार फिर आपत्तिजनक बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत का जुल्म कश्मीर में आज़ादी की लड़ाई को और मज़बूत करेगा। कश्मीर आज़ादी हासिल करेगा और भारत के कब्ज़े के खिलाफ पाकिस्तान कश्मीरी जनता का समर्थन करता रहेगा। मीटिंग में फैसला लिया गया कि 19 जुलाई को पाकिस्तान में काला दिवस मनाया जाएगा। कश्मीर के हालात पर चर्चा के लिए अगले हफ्ते संसद का संयुक्त सत्र भी बुलाया जाएगा।
पाकिस्तान के इस रुख पर भारत ने कड़ा एतराज़ जताया है। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से जुड़े आतंकवादियों के महिमामंडन से ये साफ़ है कि पाकिस्तान की सहानुभूति किसके साथ है। उम्मीद है कि पाकिस्तान भारत के अंदरूनी मामले में दख़ल देना और आतंकवाद समर्थन दे दक्षिण एशिया में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश से बाज आएगा।
दरअसल कश्मीर में हो रही हिंसा ने पाकिस्तान को एक मौक़ा दे दिया है कि वो भारत को बदनाम करे। नवाज़ शरीफ़ की सेना के साथ बन नहीं रही और पनामा पेपर्स के ज़रिए भ्रष्टाचार के आरोपों को बाद उनकी स्थिति और कमज़ोर हुई है। देश के अलग-अलग शहरों में पोस्टर्स लगा कर सेना प्रमुख राहिल शरीफ से तख़्ता पलट की अपील की जा रही है। ऐसा पहली बार नहीं है कि नवाज़ शरीफ और वहां की चुनी हुई सरकार अपनी मुसीबतों का हल कश्मीर मुद्दे को हवा देकर निकालने की कोशिश कर रहे हैं।
कश्मीर में हालात को काबू में करने की भारत की कोशिश को वो अत्याचार बता रहे हैं। हालांकि पाकिस्तान को तब मुंह की खानी पड़ी जब अमेरिकी सांसदों ने बुरहान वानी को नेता बताने वाले नवाज़ शरीफ के बयान की निंदा की। दो दिन पहले ही पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर में मानवाधिकार हनन का मामला उठाया। हालांकि यूएन में भारत के राजदूत सैय्यद अकबरूद्दीन ने इसका करारा जवाब दिया।
पठानकोट पर आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत शुरू नहीं हो पायी है। कश्मीर में आतंकवाद को पाकिस्तान की सरकार के इस खुले समर्थन के बाद दोनों देशों के बीच खाई और बढ़ गई है।
शुक्रवार को लाहौर के गर्वनर हाउस में केन्द्रीय कैबिनेट की एक ख़ास मीटिंग बुलाई गई जिसमें कश्मीर के हालात पर चर्चा की गई। मौक़े पर प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने एक बार फिर आपत्तिजनक बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत का जुल्म कश्मीर में आज़ादी की लड़ाई को और मज़बूत करेगा। कश्मीर आज़ादी हासिल करेगा और भारत के कब्ज़े के खिलाफ पाकिस्तान कश्मीरी जनता का समर्थन करता रहेगा। मीटिंग में फैसला लिया गया कि 19 जुलाई को पाकिस्तान में काला दिवस मनाया जाएगा। कश्मीर के हालात पर चर्चा के लिए अगले हफ्ते संसद का संयुक्त सत्र भी बुलाया जाएगा।
पाकिस्तान के इस रुख पर भारत ने कड़ा एतराज़ जताया है। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से जुड़े आतंकवादियों के महिमामंडन से ये साफ़ है कि पाकिस्तान की सहानुभूति किसके साथ है। उम्मीद है कि पाकिस्तान भारत के अंदरूनी मामले में दख़ल देना और आतंकवाद समर्थन दे दक्षिण एशिया में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश से बाज आएगा।
Our response to the special meeting of Cabinet of Pakistan today on recent developments in the Indian state of J&K pic.twitter.com/FcxlMUuwvF
— Vikas Swarup (@MEAIndia) July 15, 2016
दरअसल कश्मीर में हो रही हिंसा ने पाकिस्तान को एक मौक़ा दे दिया है कि वो भारत को बदनाम करे। नवाज़ शरीफ़ की सेना के साथ बन नहीं रही और पनामा पेपर्स के ज़रिए भ्रष्टाचार के आरोपों को बाद उनकी स्थिति और कमज़ोर हुई है। देश के अलग-अलग शहरों में पोस्टर्स लगा कर सेना प्रमुख राहिल शरीफ से तख़्ता पलट की अपील की जा रही है। ऐसा पहली बार नहीं है कि नवाज़ शरीफ और वहां की चुनी हुई सरकार अपनी मुसीबतों का हल कश्मीर मुद्दे को हवा देकर निकालने की कोशिश कर रहे हैं।
कश्मीर में हालात को काबू में करने की भारत की कोशिश को वो अत्याचार बता रहे हैं। हालांकि पाकिस्तान को तब मुंह की खानी पड़ी जब अमेरिकी सांसदों ने बुरहान वानी को नेता बताने वाले नवाज़ शरीफ के बयान की निंदा की। दो दिन पहले ही पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर में मानवाधिकार हनन का मामला उठाया। हालांकि यूएन में भारत के राजदूत सैय्यद अकबरूद्दीन ने इसका करारा जवाब दिया।
पठानकोट पर आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत शुरू नहीं हो पायी है। कश्मीर में आतंकवाद को पाकिस्तान की सरकार के इस खुले समर्थन के बाद दोनों देशों के बीच खाई और बढ़ गई है।
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