- ग्रेटर नोएडा के गवर्नमेंट इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में देश का पहला एआई क्लीनिक शुरू हुआ.
- यह क्लीनिक IIT कानपुर की तकनीकी सहायता से AI आधारित हेल्थकेयर स्टार्टअप्स को मार्गदर्शन देगा.
- डेटा साझा करने के लिए मॉनिटरिंग कमेटी और AI विशेषज्ञ नवाचारों की व्यावहारिकता पर निर्णय लेंगे.
मरीजों के स्वास्थ्य डेटा से अब आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) आधारित तकनीक तैयार की जाएगी, जिससे असरदार और बेहतर उपचार किया जा सके. अभी तक भारतीय मरीजों के उपचार के लिए विकसित देशों के शोध पर ज्यादातर भरोसा किया जाता रहा है. हालांकि वो हमेशा उतना प्रभावी नहीं होता था. ऐसे में अब शुक्रवार को ग्रेटर नोएडा स्थित गवर्नमेंट इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (Government Institute of Medical Sciences) में एआई क्लीनिक की शुरुआत की गई है.
जानकारी के अनुसार, जिम्स देश का पहला एआई क्लीनिक होगा और इसे आईआईटी कानपुर शैक्षणिक और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराएगा. यह क्लिनिक सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन के माध्यम से संचालित एआई आधारित हेल्थकेयर स्टार्टअप्स को क्लीनिकल वैलिडेशन, तकनीकी मार्गदर्शन, डाटा गवर्नेंस और मरीज सुरक्षा से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन प्रदान करेगा. क्लीनिक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नवाचारों को अस्पतालों का डेटा उपलब्ध कराया जाएगा, जिसका अध्ययन कर असरदार इलाज सुविधाओं को विकसित किया जा सकेगा.
इनोवेशन की दिशा में होगा काम
अभी देश में ऐसी कोई नीति नहीं है कि सरकारी अस्पताल अपना डेटा स्टार्टअप्स के साथ साझा कर सकें, लेकिन इस क्लीनिक से जुड़कर एम्स और जिम्स जैसे अस्पताल डेटा उपलब्ध करा सकेंगे. इस क्लीनिक से आईआईटी, एनआईटी समेत प्राइवेट कॉलेज भी जुड़कर अपनी तकनीकी दक्षता के जरिए इनोवेशन को विकसित करने में मदद करेंगे.
मॉनिटरिंग कमेटी और एआई विशेषज्ञ आवेदन करने वाले नवाचारों पर मंथन करेंगे और व्यावहारिक होने पर ही डेटा शेयर किया जाएगा.
सटीक इलाज देने में बनेगा सहयोगी
इंक्यूबेशन सेंटर के सीईओ डॉ. राहुल कुमार सिंह ने बताया कि क्लीनिक में जो डेटा स्टार्टअप्स को उपलब्ध होगा, वह देश का अपना होगा. डेटा में मरीज का आनुवंशिक इतिहास, बीमारी का स्वरूप या रोग का तरीका आदि की स्टडी की जाएगी, जिससे मरीजों को भविष्य में अधिक सटीक, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध हो सकेगा.
डॉक्टरों की मदद से AI सॉल्यूशन डिजाइन
जिम्स के निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा कि यह पहल भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. इससे नवाचार सीधे मरीजों और चिकित्सकों तक पहुंच सकेगा.
उन्होंने कहा कि क्लीनिक में मेडिकल इमेजिंग, मरीजों की मदद करने वाले सिस्टम और डेटा पर आधारित स्वास्थ्य समाधान बनाने वाले स्टार्टअप्स को सहयोग दिया जाएगा. साथ ही चिकित्सकों की मदद से एआई समाधान तैयार किए जाएंगे. पहले इन्हें इलाज की वास्तविक प्रक्रिया में जांचा जाएगा, नैतिक मंजूरी ली जाएगी और फिर सरकारी अस्पतालों में उपयोग के लिए तैयार किया जाएगा.
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