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This Article is From Oct 13, 2016

गोवा में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से प्रधानमंत्री मोदी को क्या उम्मीदें हैं

गोवा में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से प्रधानमंत्री मोदी को क्या उम्मीदें हैं
ब्रिक्स का गठन साल 2011 में किया गया था
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोशिश होगी कि इस हफ्ते के अंत में भारत में होने वाले ब्रिक्स समारोह से वह इस समूह में जान फूंकने का काम करें जो एक डगमगाई अर्थव्यवस्था से जूझ रहे हैं. 2011 में ब्रिक्स समूह का गठन हुआ था जिसमें ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे. इसका मकसद अपने आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव से पश्चिम के आधिपत्य को चुनौती देना है.

इन देशों का कुल अनुमानित सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 160 ख़रब है और इस समूह ने वॉशिंगटन स्थित इंटरनैशनल मोनेटरी फंड और विश्व बैंक की टक्कर में अपना खुद का बैंक स्थापित किया है. साथ ही जी7 की तर्ज पर यह अपना एक शिखर सम्मेलन भी आयोजित करता है.

लेकिन दुनिया की 53 प्रतिशत आबादी को जगह देने वाले यह देश अब वैश्विंग मांग में कमी और कमोडिटी के गिरते दाम की मार झेल रहे हैं, वहीं कुछ देशों में भ्रष्टाचार के मामले भी सामने आए हैं. रूस और ब्राज़ील मंदी का शिकार हैं, दक्षिण अफ्रीका भी पिछले महीने इसका सामना करने से बाल बाल बचा है, वहीं विश्व विकास का इंजिन समझी जा रही चीन की अर्थव्यवस्था की भी रफ्तार कम हुई है. इस उदास माहौल में अगर भारत की बात करें तो यह दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है जिसकी जीडीपी से उम्मीद है कि 2016-17 में यह 7.6 प्रतिशत से विकास करेगी.

भारत के विदेश मंत्रालय के अधिकारी अमर सिन्हा ने कहा है कि इस सम्मेलन में देश के नेता वैश्विक विकास की संभावनाओं, वैश्विक वृद्धि में ब्रिक्स की भूमिका और योगदान पर बातचीत करेंगे. यही नहीं भारत चाहेगा कि पाकिस्तान की ओर से हुए सीमा पार हमलों की भी ब्रिक्स देश निंदा करें. हालांकि जानकारों का मानना है कि इस मामले पर सभी देशों का एकजुट होकर निंदा किया जाना मुश्किल हो सकता है क्योंकि चीन और पाकिस्तान के कूटनीतिक रिश्ते और रूस की इस्लामाबाद से रक्षा मसलों को लेकर बढ़ती नज़दीकियां इस काम में रोड़ा डाल सकती हैं.

राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के कार्यलाय से जारी बयान में कहा गया है कि 'अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद और सीरिया शांति प्रक्रिया' की चर्चा की जाएगी. बता दें कि सीरिया की असद सरकार के समर्थन में मॉस्को ने एयरस्ट्राइक की थी जिसे लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी काफी आलोचना हो रही है. वहीं चीन की समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक चीन ने कहा है कि इस मौके पर सभी नेता ब्रिक्स देशों के बीच आपसी सहयोग और तमाम वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर बात करेंगे.

इसके अलावा गोवा में इस शिखर सम्मेलन के अलावा द्विपक्षीय बातचीत की उम्मीद भी जताई जा रही है जिसमें पीएम मोदी शायद चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और रूस प्रमुख पुतिन से अलग अलग मुलाकात कर सकते हैं. यह सम्मेलन इसलिए भी अहमयित रखता है क्योंकि 2014 में नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद भारत की अमेरिका और यूरोप की ओर हाथ बढ़ाने की कोशिश से ब्रिक्स का भविष्य अंधकार में नज़र आ रहा था.

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