- केतन मेहता और उनके साथियों को ईरान के बंदर अब्बास पोर्ट पर आईआरजीसी ने बंधक बनाकर 25 दिन तक रखा था
- केतन मेहता पर ईरान ने डीजल तस्करी का आरोप लगाया था, लेकिन बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया था
- अमेरिका और इजरायल ने बंदर अब्बास के नेवी बेस पर रोजाना 100 से 200 बम और मिसाइल हमले किए थे
रोज करीब 200 से ज्यादा बम और मिसाइल के हमले... चारों तरफ तबाही का मंजर और ईरान के सबसे बड़े नेवी पोर्ट बंदर अब्बास पर खडे़ आधा दर्जन नेवी शिप को बर्बाद होते अपनी आंखों से देखा. केतन और उनके साथियों को पहले जहाज पर बंधी बनाकर रखा गया. फिर जेल में डाल दिया गया. ईरान ने इन पर डीजल की तस्करी का आरोप लगाया था. लेकिन कुछ दिनों बाद इन्हें कोर्ट से जमानत मिल गई. 25 दिन तक ईरान पर हुई भारी बमबारी की दहशत देखने वाले केतन मेहता भारत पहुंचकर बार-बार ईश्वर का आभार प्रकट करते हैं. केतन मेहता ने NDTV की टीम को पूरी आपबीती बताई.
हमें बंधक बना लिया गया...
केतन मेहता बंदर अब्बास पोर्ट के नजदीक इंटरनेशनल जल सीमा में मौजूद एक जहाज की मरम्मत करने के लिए अपने 18 साथियों के साथ गए थे. इस दौरान 8 दिसंबर 2025 को आईआरजीसी (IRGC) के गार्ड ताबड़तोड़ फायरिंग करते जहाज के पास पहुंचे और सभी लोगों को बंधक बना लिया. जहाज का सामान और फ़ोन समुद्र में फेंक दिया. केतन ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगा था कि कुछ गलतफहमी हुई होगी, जल्द सब ठीक हो जाएगा, इसीलिए घर पर कुछ नहीं बताया.

शिप से फिर जेल में डाल दिया
केतन मेहता ने बताया कि 6 जनवरी 2026 तक जहाज के एक केबिन में सभी साथी बंधक रहे. इस दौरान जहाज पर मौजूद खाने से ही उन्हें गुजारा करना पड़ा. जहाज पर इस दौरान ईरान के IRGC गार्ड हमेशा मौजूद रहते थे. 6 जनवरी को जहाज में मौजूद सभी 15 लोगों को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया. 50 दिन जेल में रहने के बाद हमें जमानत पर रिहा किया गया, लेकिन आसमान से गिरे खजूर में अटके वाली कहावत तब हो गई, जब जेल से छूटने के बाद सभी लोगों को बंदर अब्बास पोर्ट के पास एक होटल में रुकवा दिया गया. 27 फरवरी को इन सभी शिप के इंजीनियर और कैप्टन को ये कहकर रुकवाया गया कि दूसरे दिन इनका टिकट भारत के लिए हो जाएगा. लेकिन अगले ही दिन अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला कर दिया. सबसे पहला निशाना बंदर अब्बास के ईरानी नेवी बेस को बनाया.
हर रोज 100-200 बम गिर रहे थे
केतन बताते हैं कि हर रोज 100-200 बम और मिसाइल बंदर अब्बास के नेवी बेस पर अमेरिका और इजरायल ने गिराया होगा. हर रोज हम आठवीं मंजिल से भागकर पहली मंजिल आते थे कि अगर होटल पर मिसाइल हमला हुआ तो हम शायद बच जाएंगे. केतन मेहता अपने होटल के आसपास भीषण बमबारी के बीच दहशत में थे. इधर गाजियाबाद में उनके परिवार के लोग रात दिन केतन की रिहाई की प्रार्थना कर रहे थे.

बंदर अब्बास में तबाही का मंजर
केतन मेहता का होटल बंदर अब्बास के नेवी बेस से बामुश्किल 500-600 मीटर रहा होगा. होटल में होने की वजह से अमेरिका इजरायल का ईरान से युद्ध का कोई अंदाज़ा इनको नहीं था. जब अमेरिका ने ईरान पर हमला किया और पहले दिन बंदर अब्बास नेवी बेस पर खड़े ननसैनिक जहाज़ को निशाना बनाया, तब केतन को खतरे का अंदाज़ा हुई. उन्होंने बताया कि होटल में रहते हुए करीब 2000-3000 हजार बम और मिसाइल बंदर अब्बास के अलग-अलग सैनिक ठिकानों पर अमेरिका की ओर दागे गए. केतन ने बताया कि बंदर अब्बास पर खड़े उस वक्त 4-6 जहाज को पूरी तरह से बमबारी में खत्म कर दिया. चारों तरफ तबाही का मंजर था. हमले के वक्त एक हजार से ज्यादा लोग बंदर अब्बास के बेस पर थे.
ये भी पढ़ें :- अमेरिका में अकेले पड़ गए ट्रंप! सर्वे में दो-तिहाई जनता ने कहा- किसी कीमत पर तुरंत ईरान जंग से निकलो
सड़क के रास्ते 21 मार्च को निकले
ईरान में फंसे दो हजार भारतीय छात्र के साथ केतन मेहता समेत 16 लोगों को भारत लाना भी एक बड़ा मिशन था. केतन ने बताया कि बस से बंदर अब्बास से करीब 1900 KM का सफर तय करके आर्मेनिया पहुंचे. इस सफर में भी लगातार आसपास के पहाड़ों से धमाकों की आवाज आ रही थी. हम लोग डर के बीच किसी तरह आर्मेनिया बार्डर पर पहुंचे. लेकिन अच्छी बात ये रही है कि इस दौरान भारतीय दूतावास के अधिकारी लगातार केतन मेहता के संपर्क में थे. मेहता परिवार अब भारत सरकार का धन्यवाद कर रही है कि दूतावास से लेकर विदेश मंत्रालय ने उनकी पूरी मदद की.
ये भी पढ़ें :- अमेरिका पीछे हटने को तैयार, इजरायल आक्रामक… क्या ईरान युद्ध में अकेले पड़ रहे नेतन्याहू?
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं