- पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि रेसिंग कारों में इथेनॉल का इस्तेमाल उनकी गति बढ़ाने में मदद करता है
- सरकार ने बायोफ्यूल की अधिक ब्लेंडिंग को बढ़ावा दिया है, जिससे तेल कंपनियों पर आर्थिक बोझ कम होगा
- मिडिल ईस्ट संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से सरकारी तेल कंपनियों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने आज कहा कि रेसिंग कारों में इथेनॉल का इस्तेमाल हो रहा है और बायोफ्यूल उनकी रफ्तार बढ़ाने में मदद करता है. पुरी ने बायोफ्यूल की ज्यादा ब्लेंडिंग को बढ़ावा देने के सरकार के फैसले का बचाव किया. उन्होंने यह बात मिडिल ईस्ट संकट की वजह से कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में हालिया उतार-चढ़ाव के बीच तेल मार्केटिंग कंपनियों पर पड़ने वाले भारी आर्थिक बोझ का जिक्र करते हुए कही.
मंत्री की ये बातें ऐसे समय में आईं जब सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियां भारी नुकसान का सामना कर रही हैं. पुरी ने बताया कि 30 जून तक की अवधि में, जब मिडिल ईस्ट में संघर्ष के कारण ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ गई थीं, तेल कंपनियों को लागत से कम कीमत पर पेट्रोल, डीजल और LPG बेचने के कारण 74,781 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.
क्या पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम होंगी?
अप्रैल-जून 2026 के दौरान पेट्रोल, डीजल और LPG पर कुल अंडर-रिकवरी 1,88,871 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. तब से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें कम हुई हैं, लेकिन कंपनियां अभी भी उस स्टॉक का इस्तेमाल कर रही हैं, जो संकट के चरम पर खरीदा गया था.मंत्री ने बताया, "हम आज उस कच्चे तेल के स्टॉक का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसे हमने दो महीने पहले खरीदा था (उस कीमत पर जो दो महीने पहले थी)." जब उनसे रिटेल फ्यूल की कीमतों में संभावित कटौती के बारे में पूछा गया, तो पुरी ने कहा कि फिलहाल यह सिर्फ एक संभावना है. उन्होंने कहा, "अगर यह (गिरावट) 2-3 महीने तक जारी रहती है, तो हम देखेंगे. लेकिन अभी यह सिर्फ एक काल्पनिक स्थिति है."
मंत्री ने बताया इथेनॉल क्यों जरूरी
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, अमेरिका E10 का इस्तेमाल करता है, साथ ही E15 का दायरा भी बढ़ रहा है और लाखों फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां E85 तक के ईंधन पर चल रही हैं. ब्राजील E27 के अनिवार्य इस्तेमाल और इससे भी ज्यादा इथेनॉल वाले मिश्रण की योजनाओं के साथ सबसे आगे है; वहां कई नई गाड़ियां फ्लेक्स-फ्यूल वाली हैं जो 100 प्रतिशत तक इथेनॉल पर चल सकती हैं.
मंत्री ने कहा कि कनाडा, थाईलैंड, जापान और कई यूरोपीय देशों ने भी इसे अपनाया है. भारत का E20 प्रोग्राम भी इसी अंतरराष्ट्रीय चलन के अनुरूप है. इथेनॉल की हाई ऑक्टेन रेटिंग (लगभग 108 RON) इसे हाई-परफॉर्मेंस इंजन के लिए बहुत खास बनाती है. यह बेहतरीन एंटी-नॉक गुण और पावर देता है, साथ ही कूलिंग का असर भी पैदा करता है, जिससे टर्बोचार्ज्ड और हाई-कम्प्रेशन मोटरों की कार्यक्षमता (एफिशिएंसी) बढ़ती है.
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, भारत के इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) प्रोग्राम की शुरुआत 2000 के दशक की शुरुआत में हुई थी, जब 5 प्रतिशत ब्लेंडिंग के शुरुआती पायलट प्रोजेक्ट चलाए गए थे.
प्रोडक्शन क्षमता 2013-14 में लगभग 38 करोड़ लीटर से बढ़कर अब 2,000 करोड़ लीटर सालाना हो गई है. ब्लेंडिंग का स्तर बहुत कम 1.5 प्रतिशत से बढ़कर 20 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो दिसंबर 2025 में हासिल किया गया. 2014-15 से, इस प्रोग्राम से विदेशी मुद्रा में 1.90 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत हुई है, किसानों को 1.60 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान किया गया है, 310 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा कच्चे तेल की जगह इथेनॉल का इस्तेमाल हुआ है, और CO₂ उत्सर्जन में लगभग 930 लाख मीट्रिक टन की कमी आई है.
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