Real Estate Fraud: घर और दुकान खरीदने का सपना देख रहे लोगों और छोटे निवेशकों से कथित धोखाधड़ी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने बड़ी कार्रवाई की है. ED के अहमदाबाद जोनल ऑफिस ने रोनक रवजीभाई सोनानी, विपुलभाई गोरधनभाई गंगानी, केशव नारायण ग्रुप और अन्य आरोपियों से जुड़े मामलों में करीब 129.80 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां अस्थायी तौर पर अटैच की हैं. यह कार्रवाई 14 अगस्त 2026 को PMLA की धारा 5(1) के तहत जारी प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के आधार पर की गई है.
घर-दुकान देने के नाम पर लोगों से पैसा लेने का आरोप
ED की जांच के मुताबिक, आरोपियों ने अहमदाबाद में आम लोगों, छोटे निवेशकों, कारोबारियों और मध्यमवर्गीय परिवारों को अपने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के नाम पर निवेश के लिए तैयार किया. लोगों को बताया गया कि प्रोजेक्ट पूरी तरह वैध हैं और उन्हें फ्लैट और दुकानें आकर्षक प्री-लॉन्च कीमतों पर दी जाएंगी.
- इतना ही नहीं, निवेशकों को 54 फीसदी से लेकर 100 फीसदी तक के रिटर्न का भरोसा भी दिया गया. इन आकर्षक ऑफरों के चलते बड़ी संख्या में लोगों ने आरोपियों के प्रोजेक्ट्स में पैसा लगा दिया.
- ED के मुताबिक, जिन प्रोजेक्ट्स में लोगों से पैसा लिया गया, उनमें जरूरी वैधानिक मंजूरियां भी नहीं थीं. आरोप है कि प्रोजेक्ट्स को RERA में रजिस्टर नहीं कराया गया था और N.A. परमिशन भी नहीं ली गई थी.
- अहमदाबाद के छारोड़ी प्रोजेक्ट में करीब 250 खरीदारों और निवेशकों से पैसा लिया गया. वहीं अक्षर अनंत प्रोजेक्ट में 44 से ज्यादा लोगों से रकम ली गई. लेकिन बाद में न तो लोगों को फ्लैट और दुकानें मिलीं और न ही उनका पैसा वापस किया गया.
- ED की जांच में आरोपियों के काम करने का एक कथित तरीका सामने आया है. पहले लोगों को प्रोजेक्ट का सपना दिखाया गया, उनसे पैसा लिया गया और बाद में उस रकम को दूसरी जगह डायवर्ट करने और उससे जुड़ी संपत्तियों को छिपाने की कोशिश की गई.
प्रोजेक्ट में पैसा लगाने वाले खरीदार फंस गए
छारोड़ी प्रोजेक्ट में खरीदारों को बताया गया कि RERA रजिस्ट्रेशन और N.A. परमिशन की प्रक्रिया चल रही है. बाद में जिस जमीन पर प्रोजेक्ट बनाया जाना था, उसे केवल महेंद्रभाई पटेल, आशीष विष्णुभाई पटेल और अन्य लोगों को बेचने या ट्रांसफर करने का आरोप है. इससे प्रोजेक्ट में पैसा लगाने वाले खरीदार फंस गए.
अक्षर अनंत प्रोजेक्ट में भी फर्जीवाड़ा
इसी तरह शेला के अक्षर अनंत प्रोजेक्ट में भी MoU और दूसरे दस्तावेजों के जरिए प्रोजेक्ट को वैध और वास्तविक दिखाने की कोशिश की गई. बाद में प्रोजेक्ट बंद कर दिया गया और जमीन को पुरव रमेशचंद्र पटेल, दिप्राजवीरसिंह विक्रमसिंह झाला, महेंद्रसिंह प्रद्युम्नसिंह चुडासमा और अन्य लोगों को ट्रांसफर किए जाने की बात जांच में सामने आई है.
डमी सेल डीड का किया गया इस्तेमाल
ED के मुताबिक, आरोपियों ने संपत्तियों को तीसरे पक्ष के नाम ट्रांसफर करने के लिए कथित तौर पर डमी सेल डीड का इस्तेमाल किया. इन दस्तावेजों में भुगतान की ऐसी जानकारी दिखाई गई, जिससे लेन-देन वास्तविक और कानूनी नजर आए. हालांकि ED की जांच में इन भुगतानों को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं और एजेंसी का आरोप है कि वास्तविक भुगतान किए बिना संपत्तियों के ट्रांसफर को वैध दिखाने की कोशिश की गई.
इस मामले में ED ने अहमदाबाद के DCB पुलिस स्टेशन, सैटेलाइट पुलिस स्टेशन, नवरंगपुरा पुलिस स्टेशन और बोपल पुलिस स्टेशन में दर्ज पांच FIR के आधार पर जांच शुरू की थी. इन मामलों में रोनक सोनानी, विपुल गंगानी और अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की अलग-अलग धाराओं में चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है.
ED ने कहां-कहां की संपत्ति की सीज
ED ने जिन संपत्तियों को अटैच किया है, उनमें छारोड़ी में 6,603.332 वर्ग मीटर जमीन, शेला में 7,284 वर्ग मीटर जमीन और कड़ी तालुका के जेसंगपुरा और अगोल में 30,798 वर्ग मीटर जमीन शामिल है.
इन सभी अचल संपत्तियों की कुल कीमत करीब 129.80 करोड़ रुपये बताई गई है. ED का कहना है कि ये संपत्तियां अपराध से हासिल रकम यानी Proceeds of Crime से जुड़ी हैं.
ED के मुताबिक संपत्ति अटैच करने का मकसद इन जमीनों को आगे बेचने, ट्रांसफर करने या छिपाने से रोकना है. इससे उन होमबायर्स और निवेशकों के हितों की रक्षा करने में मदद मिलेगी, जिनसे कथित तौर पर धोखाधड़ी हुई है. PMLA के तहत आगे की कार्रवाई में इन संपत्तियों की जब्ती और पात्र पीड़ितों को रकम लौटाने की प्रक्रिया में भी यह कार्रवाई अहम हो सकती है.
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