बिक्स में दुनिया भर के नेताओं का जमावड़ा दिल्ली में लगा हुआ है. इस दौरान पीएम मोदी के साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग हाथ थामे और चेहरे पर मुस्कान लिए तस्वीर दुनिया भर का ध्यान खींच रही है.
लेकिन इस तस्वीर में पीएम मोदी की बात को विदेशी नेताओं तक पहुंचाने वाले अफसर सिद्धार्थ बाबू भी दिख रहे हैं. सिद्धार्थ बाबू को अकसर पीएम मोदी के साथ देखा जाता है.

कौन हैं सिद्धार्थ बाबू?
सिद्धार्थ बाबू केरल के कोच्चि से हैं. उनकी शुरुआती पढ़ाई डिप्लोमेसी से जुड़ी नहीं है. उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में ई-कॉमर्स सेक्टर में काम किया है. सिविल सर्विसेज उनका पहला प्लान नहीं था. हालांकि, धीरे-धीरे उनकी दिलचस्पी बदल गई क्योंकि उन्हें यह जानने की इच्छा हुई कि देश कैसे एक-दूसरे से बातचीत करते हैं, बातचीत करते हैं और मिलकर समस्याओं को हल करते हैं. इसी जिज्ञासा ने इंटरनेशनल डिप्लोमेसी में उनके भविष्य के करियर का पहला बीज बोया.

इसके बाद उन्होंने ग्लोबल पॉलिटिक्स और दुनिया के मंच पर भारत की भूमिका के बारे में और पढ़ना शुरू किया. फिर वक्त के साथ, यह दिलचस्पी उनकी कॉर्पोरेट नौकरी से भी ज्यादा मज़बूत होती चली गई.
इसी सपने को पूरा करने के लिए सिद्धार्थ बाबू ने UPSC परीक्षा की तैयारी करने का फैसला किया, उन्हें पूरी तरह पता था कि इस सफर में सब्र और अनुशासन की जरूरत होगी. लेकिन उनकी कड़ी मेहनत ने उन्हें सफलता का स्वाद भी चखने का मौका दिया.
हार नहीं माना
UPSC सिविल सर्विसेज एग्जाम में पहले अटेम्ट में सिद्धार्थ बाबू पास नहीं कर पाए. हार मानने के बजाय, उन्होंने इस फेलियर को सीखने का एक फेज माना.
उन्हें एहसास हुआ कि UPSC में सक्सेस पढ़ाई करने से नहीं क्लियर होगा. यह पैटर्न समझने, टाइम मैनेज करने और फोकस्ड रहने के बारे में है. इस समझ ने उन्हें अपने अप्रोच पर फिर से सोचने और अपने दूसरे अटेम्प्ट के लिए बेहतर तैयारी करने में मदद की.

15वीं रैंक के बावजूद IFS चुना
दूसरे अटेम्प्ट में, सिद्धार्थ बाबू ने इंटरनेशनल रिलेशंस को अपना ऑप्शनल सब्जेक्ट चुना. UPSC 2016 के एग्जाम में, उन्होंने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 15 हासिल की. इतनी अच्छी रैंक के बावजूद, उन्होंने इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (IAS) चुनने के बजाय, उन्होंने इंडियन फॉरेन सर्विस (IFS) चुना और ग्लोबल अफेयर्स के लिए अपने पैशन पर कायम रहे.
इंडियन फॉरेन सर्विस (IFS) में शामिल होने के बाद, सिद्धार्थ बाबू ने एडवांस्ड ट्रेनिंग ली. समय के साथ, वह कई भाषाओं में माहिर हो गए. उनकी भाषा की स्किल और शांत स्वभाव ने की वजह से उन्हें सेंसिटिव डिप्लोमैटिक रोल के चुना गया. इन्हीं काबिलियत की वजह से उन्हें अक्सर हाई-लेवल मीटिंग और इंटरनेशनल इवेंट के दौरान पीएम मोदी के साथ देखा जाता है.
अभी, सिद्धार्थ बाबू विदेश मंत्रालय (MEA) में डिप्टी सेक्रेटरी (यूरोप और अमेरिका) के तौर पर काम कर रहे हैं.
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