नई दिल्ली में आयोजित हुए NDTV World Summit में अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के पूर्व डायरेक्टर और रिटायर्ड जनरल डेविड हॉवेल पेट्रियस (Gen. David H Petraeus) ने शिरकत की. इस दौरान उन्होंने युद्ध और सेनाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका पर एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर ग्लोबल एनालिसिस शेयर किया. जनरल पेट्रियस ने चेतावनी दी कि आने वाले समय में लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs) की दिमागी ताकत एक महान नोबेल पुरस्कार विजेता के स्तर की होगी, जो कि बेहद घातक साबित हो सकती है.
David H Petraeus ने रक्षा प्रणालियों और युद्ध के मैदान में AI के बढ़ते इस्तेमाल को बताते हुए कहा कि भविष्य की सेनाओं में क्रांतिकारी बदलावों की तत्काल जरूरत है. AI की मदद से अब युद्ध लड़ने के तरीके हमेशा के लिए पूरी तरह बदलने जा रहे हैं.
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बिना सोए और बिना थके काम करेंगे AI एजेंट्स
CIA के पूर्व प्रमुख ने भविष्य में सेनाओं के भीतर काम करने वाले डिजिटल कमांडर्स और अधिकारियों की एक हैरान कर देने वाली कल्पना दुनिया के सामने रखी. उन्होंने कहा, एक समय ऐसा आएगा जब हमारे लिए कई AI एजेंट्स मिलकर काम कर रहे होंगे. एक सैन्य कमांडर के नजर से देखें, तो ये ऐसे स्टाफ ऑफिसर्स होंगे जो कभी नहीं सोते, कभी खाना नहीं खाते और जिन्हें कभी आराम करने की जरूरत नहीं होती. दिमागी क्षमता के मामले में वे नोबेल पुरस्कार विजेताओं की तरह होंगे और वे केवल मेरे अभी मौजूदा LLM की तरह दुनिया भर की खबरों की निगरानी करने, रिपोर्ट बनाने और जानकारी खोजने तक ही सीमित नहीं रहेंगे.
उन्होंने AI की डेटा फ्यूजन क्षमता की तारीफ करते हुए कहा, "आप हवाई हमलों से बचने के लिए AI आधारित एक पूरी ऑटोनॉमस सिस्टम तैयार कर सकते हैं. भविष्य का हवाई और बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस रडार, अकॉस्टिक सेंसर और कई दूसरे सुरक्षा डिवाइस का एक बेहतरीन मिक्स्चर होगा, जिन्हें आपस में मिलाने में AI मैजिक की तरह मदद करेगा. चूंकि ये सब आखिरकार डेटा ही है, इसलिए AI इस डेटा को मिलाकर एक बेहद सटीक और हाई-फिडेलिटी हवाई सुरक्षा चित्र तैयार कर देगा.
युद्ध के मैदान से हमेशा के लिए गायब हो जाएंगे इंसानी सैनिक
Gen. David H Petraeus ने आधुनिक तकनीक के दम पर हमेशा के लिए बदल चुके युद्धक्षेत्र के भयानक सच को बयान किया. पूर्व सीआईए डायरेक्टर ने कहा, युद्ध के तौर-तरीके अब पूरी तरह बदल चुके हैं. पारंपरिक पैंतरेबाजी वाले युद्ध जिसमें टैंक, पैदल सेना, इंजीनियर्स, हवाई सुरक्षा प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर शामिल होते थे, अब इस नए युग में टिक नहीं सकते. आज के समय में हमारे पास एक ऐसी 'डेथ जोन' है, जो सैनिकों की आगे की पंक्ति से आगे तक फैली हुई है. वैसे अब कोई अग्रिम सीमा रेखा बची भी नहीं है. यदि आपके पास सुरक्षा खाइयाँ भी हैं, तो हैकर्स या दुश्मन सीधे ड्रोन उड़ाकर खाई के अंदर घुस सकते हैं. आज के समय में जो कुछ भी खुली सड़क या मैदान में दिखाई देगा, वह पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा.
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उन्होंने आगे बताया कि अभी अग्रिम मोर्चों पर तैनात सैनिक अब जमीन के नीचे सुरंगों में रहते हैं. वे केवल मॉडर्न कैमरों और डिवाइस के जरिए ही बाहर की दुनिया देख सकते हैं. इन सैनिकों तक भोजन और गोला-बारूद इंसानों द्वारा गाड़ियों में पहुंचाने के बजाय, रिमोट से चलने वाले मानवरहित जमीनी वाहनों (UGVs) और रिमोट से उड़ने वाले ड्रोन्स के जरिए पहुचाया जा रहा है.
जनरल पेट्रियस ने साफ किया कि हम अभी पूरी तरह से ऑटोनोमस वारफेयर के दौर में नहीं पहुंचे हैं. ऐसे रोबोटिक सिस्टम जो बिना किसी इंसानी मदद के खुद चलते और फैसले लेते हैं, उन पर अभी शुरुआती टेस्टिंग चल रही हैं, लेकिन हमें उम्मीद है कि इस साल के अंत तक या अगले साल की शुरुआत तक हम बहुत बड़ी संख्या में ऐसी रोबोटिक और AI पावर्ड सिस्टम को असल दुनिया में काम करते हुए देखेंगे.
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