दिल्ली हाई कोर्ट ने AISA अध्यक्ष नेहा बोरा की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने SEM कोर्ट के नोटिस को चुनौती दी थी. इस नोटिस में उनसे जांच के दौरान शांति बनाए रखने के लिए एक जमानतदार के साथ 10,000 रुपये का बॉन्ड भरने को कहा गया था. हालांकि, हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई कर रहे मजिस्ट्रेट को कुछ निर्देश भी दिए हैं. अदालत ने कहा है कि नेहा बोरा को मामले से जुड़ी सभी जरूरी दस्तावेज और सामग्री उपलब्ध कराई जाए, ताकि वह अपना पक्ष प्रभावी तरीके से रख सकें. साथ ही कोर्ट ने पीस बॉन्ड भरने के निर्देश दिए हैं.
नेहा बोरा ने अपनी याचिका में उस नोटिस को चुनौती दी था, जिसमें उन्हें 10,000 रुपए का बॉन्ड भरने और शांति बनाए रखने का निर्देश दिया गया था. सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि नेहा बोरा की याचिका सुनवाई योग्य नहीं है.
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दिल्ली पुलिस की ओर से पेश एएसजी चेतन शर्मा ने नेहा बोरा के उस तर्क को खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि बीएनएसएस की धारा 163 केवल मंडी हाउस क्षेत्र में लागू थी, कनॉट प्लेस में नहीं और जिस समय घटना हुई उस समय यह धारा लागू नहीं थी. चेतन शर्मा ने कहा कि यह दलील तथ्यात्मक रूप से गलत है. धारा 163 प्रभावी थी, पुलिस बल सीमित था और नेहा बोरा पुलिस को चकमा देकर कनॉट प्लेस की ओर बढ़ती रहीं.
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