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यूजीसी नियम के समर्थन में शांतिपूर्ण प्रदर्शन अपराध नहीं.., चंद्रशेखर आजाद ने यूपी सरकार पर साधा निशाना

चंद्रशेखर आजाद ने लखनऊ में यूजीसी के समर्थन में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर हुए FIR पर नाराजगी जताई है. उन्होंने आरोप लगाया कि नफरत फैलाने वालों पर कार्रवाई न करके सरकार संविधान और समानता के सिद्धांतों को कमजोर कर रही है.

यूजीसी नियम के समर्थन में शांतिपूर्ण प्रदर्शन अपराध नहीं.., चंद्रशेखर आजाद ने यूपी सरकार पर साधा निशाना
नई दिल्ली:

लोकसभा सांसद चंद्रशेखर आजाद ने उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए यूजीसी के नए नियमों के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर दर्ज हुई FIR को “चयनात्मक कार्रवाई” करार दिया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स' पर पोस्ट करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार पर गंभीर सवाल उठाए. चंद्रशेखर आजाद ने अपने बयान में कहा कि लखनऊ में यूजीसी के पक्ष में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लगभग 100 लोगों पर फर्जी आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया, जबकि कुछ दिन पहले यूजीसी का विरोध करते हुए किए गए बेहद आपत्तिजनक नारों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई.

उनके अनुसार, विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ “कब्र खोदने” जैसे नारे लगाए गए, जातिगत गालियां दी गईं और खुली नफरत फैलाई गई, लेकिन इसके बावजूद किसी पर FIR दर्ज न होना सरकार के दोहरे मापदंड को उजागर करता है.

सांसद ने कहा कि यह स्थिति साफ़ दिखाती है कि अब उत्तर प्रदेश में कानून “सबके लिए समान” नहीं रह गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण समर्थन को अपराध की तरह देखा जा रहा है, जबकि नफरत फैलाने वालों को संरक्षण दिया जा रहा है. यह न केवल लोकतंत्र के सिद्धांतों के विपरीत है, बल्कि संविधान की मूल भावना का भी उल्लंघन है. 

चंद्रशेखर आजाद ने मांग की कि यूजीसी के समर्थन में प्रदर्शन करने वालों पर दर्ज सभी फर्जी FIR तत्काल वापस ली जाएं. साथ ही, नफरत फैलाने वालों, जातिगत गालियां देने वालों और आपत्तिजनक नारे लगाने वालों पर बिना किसी भेदभाव के सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए. उन्होंने कहा कि अगर कानून जाति या राजनीतिक पसंद के आधार पर लागू होगा, तो यह “कानून का राज नहीं बल्कि सत्ता का अन्याय” होगा.

उन्होंने स्पष्ट कहा कि संविधान, समानता और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए वे इस दोहरे रवैये के खिलाफ अपनी आवाज उठाते रहेंगे. उनका यह बयान प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर नया विमर्श खड़ा कर रहा है, खासकर तब जब यूपी में कानून-व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं.

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