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जब फंदे से लटकी मिली थी भाजपा विधायक की लाश, बंगाल में राजनीतिक हत्याओं के दिल दहलाने वाले 8 मामले

Kolkata News: बंगाल में राजनीतिक हिंसा का दौर 60 के दशक से चला रहा है. पार्टी कैडरों का वर्चस्व, सत्ता के साथ रहने वाले सिंडिकेट औऱ राजनीतिक रंजिश से ये खूनखराबा देखने को मिलता है.

जब फंदे से लटकी मिली थी भाजपा विधायक की लाश, बंगाल में राजनीतिक हत्याओं के दिल दहलाने वाले 8 मामले
Suvendu Adhikari PA Chandranath Rath : सुवेंदु अधिकारी के पीए की हत्या
कोलकाता:

बंगाल में राजनीतिक हिंसा का पुराना इतिहास रहा है, जहां विचारधारा की लड़ाई अक्सर रंजिश और वर्चस्व की जंग में बदल जाती है. बंगाल में बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की हत्या भी इसी फेहरिस्त का हिस्सा है. इसमें भाजपा विधायक की 2020 में मौत का मामला काफी सनसनीखेज रहा है. साथ ही बोगतुई नरसंहार भी याद होगा, जिसमें 10 लोगों को जिंदा जला दिया गया था. बीजेपी का आरोप है कि 2016 से बंगाल में उसके करीब 300 कार्यकर्ताओं और नेताओं की हत्या की गई है. 

इलाका दखल की राजनीति 

बंगाल में इलाका दखल एक मशहूर शब्द है, जिसका मतलब किसी खास इलाके या गांव पर पूर्ण राजनीतिक नियंत्रण स्थापित करना होता है. जो पार्टी इलाके को नियंत्रित करती है, वही यह तय करती है कि वहां कौन सा सरकारी लाभ (जैसे राशन, आवास योजना) किसे मिलेगा. इसके लिए विपक्षी कार्यकर्ताओं को डराना-धमकाना, घर जलाना या हत्या करने से भी नहीं चूकते.बंगाल में पार्टियां चुनाव से ज्यादा संगठन पर निर्भर करती हैं. पार्टी कार्यकर्ता (कैडर) केवल चुनाव के वक्त सक्रिय नहीं होते, बल्कि वे गांव के हर छोटे-बड़े सामाजिक मामले में दखल रखते हैं. जब सत्ता बदलती है, तो पुरानी सरकार के कार्यकर्ता खुद को बचाने के लिए नई सत्ताधारी पार्टी में शामिल हो जाते हैं, लेकिन पुरानी रंजिशें खत्म नहीं होतीं, जिससे खूनी संघर्ष चलते रहते हैं.

सिंडिकेट का राज

चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले को देखें तो बंगाल के कई इलाकों में उद्योगों की कमी, भारी बेरोजगारी के कारण स्थानीय राजनीति कमाई-वसूली का हथकंडा बन गई है. निर्माण सामग्री की आपूर्ति, कोयला, बालू खनन और सरकारी ठेकों पर नियंत्रण पाने के लिए राजनीतिक संरक्षण सुरक्षा कवच का काम करता है. ठेकेदारी में इसी वर्चस्व के लिए हिंसक झड़पें भी होती हैं. पुलिस और स्थानीय प्रशासन अक्सर सत्ताधारी दल के दबाव में काम करते हैं.

1. हेमंत बसु की हत्या

फॉरवर्ड ब्लॉक के कद्दावर नेता हेमंत बसु की 1971 में हत्या बंगाल की सबसे सनसनीखेज राजनीतिक हत्याओं में से एक मानी जाती है.1971 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कोलकाता के श्यामपुकुर में उनकी दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी. वह नेताजी सुभाष चंद्र बोस के करीबी सहयोगी थे और उनकी हत्या ने पूरे बंगाल को स्तब्ध कर दिया था.

2. अजीत पंजा पर हमला 

बंगाल में सिद्धार्थ शंकर राय की सरकार और वामपंथियों के बीच संघर्ष में 70 के दशक में कई बड़े चेहरों को निशाना बनाया गया. न केवल जमीनी कार्यकर्ता बल्कि जिला स्तर के अध्यक्षों और पूर्व विधायकों की हत्याएं इस दौर में आम थीं. इसी में अजीत पंजा पर हमला किया गया. 

3. नंदीग्राम और सिंगुर आंदोलन 

नंदीग्राम और सिंगुर आंदोलन के दौरान वामपंथी विधायकों और टीएमसी के उभरते नेताओं के बीच ऐसे ही वर्चस्व की जंग छिड़ी.सईदुल्ला खान कई पूर्व पंचायत प्रमुखों और स्थानीय प्रभावशाली नेताओं की हत्याएं इस दौरान हुईं, ताकि चुनावी क्षेत्रों में वर्चस्व कायम रखा जा सके,

4. कृष्णेंदु मुखोपाध्याय पर हमला (2019-2021)

बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 के दौरान बीजेपी की राज्य समिति के सदस्य कृष्णेंदु मुखर्जी पर ऐसे ही कार पर हमला कर जान लेने की कोशिश की गई. कोलकाता से रात में लौटते समय डाली लाज में घर के पास तीन हमलावरों ने पहले कार का दरवाजा खोलने का प्रयास किया. फिर ताबड़तोड़ गोलीबारी कर दी. नकाबपोश हमलावरों की गोलीबारी के बीच कृष्णेंदु ने कार का हॉर्न बजाना जारी रखा, जिससे बदमाश भाग गए. 

5. बीजेपी विधायक की मौत

जुलाई 2020 में उत्तर दिनाजपुर के हेमताबाद से भाजपा विधायक देवेंद्र नाथ राय का शव एक दुकान के बाहर लटका हुआ मिला था. भाजपा ने इसे राजनीतिक हत्या करार दिया था.रात में कुछ बाइक सवार उन्हें घर से बुलाकर ले गए थे और सुबह लाश मिली. 

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6. भाजपा पार्षद मनीष शुक्ला की हत्या

टीटगढ़ में भाजपा नेता मनीष शुक्ला की पुलिस स्टेशन के सामने गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. वो सांसद अर्जुन सिंह के करीबी माने जाते थे.मई 2021 के चुनावी नतीजों के बाद बंगाल में हिंसा हुई. कोलकाता के बेलियाघाटा में भाजपा नेता अभिजीत सरकार की हत्या कर दी गई. कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई को इसकी जांच सौंपी गई. कई बूथ स्तर के अध्यक्षों और सक्रिय कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया.

7. बोगतुई नरसंहार- 10 लोगों को जिंदा जलाया गया

बंगाल के बीरभूम जिले के रामपुरहाट में 2022 में भादू शेख की हत्या हुई.  इसके बदले में बोगतुई नरसंहार हुआ, जहां विपक्षी समर्थकों के घरों को जलाकर बच्चों और महिलाओं की जान ले ली गई. इस हिंसा में 10 लोगों को जिंदा जला दिया गया था. 

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8. भाजपा प्रत्याशी पर हमला

बंगाल चुनाव से पहले मेदिनीपुर जिले के दांतन इलाके में भाजपा प्रत्याशी अजीत कुमार जाना पर जानलेवा हमला हुआ था.भाजपा की मोटरबाइक रैली में बदमाशों के एक गिरोह ने अचानक हमला बोल दिया. भाजपा का आरोप है कि हमलावर तृणमूल कांग्रेस (TMC) से जुड़े थे. हमले में भाजपा प्रत्याशी अजीत कुमार जाना समेत कई कार्यकर्ता और समर्थक घायल हो गए. कई मोटरसाइकिलों को तोड़ दिया गया.
 

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