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न खाद डालने का झंझट न पसीना बहाने की जरूरत…फ्लैट की बॉलकनी में करें AI के जरिए ऑटोमेटिक खेती, जानिए कीमत

माइक्रोसॉफ्ट के AI Agri Pilot से फ्लैट की बालकनी में ऑटोमेटिक खेती करें, ना खाद का झंझट, ना धूप या पानी की चिंता. जानें फीचर्स और भारत में संभावित कीमत.

न खाद डालने का झंझट न पसीना बहाने की जरूरत…फ्लैट की बॉलकनी में करें AI के जरिए ऑटोमेटिक खेती, जानिए कीमत
एआई खेती में भी लाएगी क्रांति
  • AI Agri Pilot तकनीक के माध्यम से बिना पानी या धूप की चिंता किए घर की बालकनी में फसल उगाई जा सकती है
  • Microsoft का AI Agri Pilot खेती के लिए पोषक तत्व और फसल की देखभाल मोबाइल ऐप से नियंत्रित करता है
  • यह तकनीक फिलहाल बड़ी कंपनियों को उपलब्ध है और भारत में इसकी कीमत लगभग पंद्रह हजार रुपए हो सकती है
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नई दिल्ली:

ना पानी डालने की झंझट, ना धूप की ज़रूरत… इस खेती में न आपको पसीना बहाना है न ही खाद की जानकारी इकट्ठा करना है. AI Agri Pilot में बस फसल का नाम फीड करना है और एक पोषक तत्व की कैप्सूल डालनी है. बस सलाद पत्ता हो या गोभी, टमाटर हो या पालक, आपको नियत समय में फसल तैयार मिलेगी. इस खेती के लिए केवल आपको अपनी बालकनी में AI Agri Pilot का स्टैंड लाना है. बीज डालने के बाद सारा काम AI Pilot करेगा.

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एआई तकनीक वाली खेती का क्या फायदा

कितनी रोशनी की जरूरत है, कब पानी देना है, खाद की मात्रा क्या होगी. ये सब AI तय करेगा… बस आप अपने मोबाइल पर इन सब्जियों को उगते हुए देख सकते हैं. Microsoft के AI Agri Pilot के सह-संस्थापक, अमेरिका से आए प्रशांत मिश्रा बताते हैं कि फिलहाल इस तरह की खेती दुबई और अमेरिका में कर रहे है. जिन लोगों को खेती की समझ न के बराबर है और जिनके पास जमीन नहीं है, वो अपने घर पर ही इस तरह की सब्ज़ी या फसल उगा सकते हैं.

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AI Agri Pilot की कीमत कितनी?

Microsoft कंपनी का ये AI Agri Pilot फिलहाल बड़ी कंपनियों को दिया जा रहा है, मसलन खाने-पीने के सामान बनाने वाली, लेकिन ये अब आम लोगों के लिए भी उपलब्ध रहेगी. भारत में AI Agri Pilot की कीमत क़रीब 15,000 रुपए के आसपास रहने की संभावना है. फिलहाल इसका उपयोग बर्गर या दूसरे खाने के सामान बेचने वाली कंपनियां कर रही हैं.

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AI की मदद से महाराष्ट्र में उगाया 22 फीट का गन्ना

इससे चीनी मिलों को लंबे समय, यानी 110 दिन से ज़्यादा, मिल चलाने में मदद मिलेगी और घाटा भी कम होगा. माइक्रोसॉफ्ट के CTO रनवीर चंद्रा ने बताया कि गन्ने की खेती के लिए AI के इस्तेमाल पर लंबे समय से काम किया है और गन्ने के उत्पादन में 30 प्रतिशत की वृद्धि और पानी का इस्तेमाल आधे से भी कम करके अच्छी फसल उगाई है.

खुद शरद पवार तक ने इस तकनीक को देखा है. अमेरिका से इस AI Summit में शामिल होने के लिए आए रनवीर कहते हैं कि वो खुद बिहार से ताल्लुक़ रखते हैं, खेती में कितनी मुश्किल है उसके बारे में पता है. इसी लिए कंप्यूटर साइंस में एक्सपर्ट होने के बाद मैंने सोचा कि AI का इस्तेमाल खेती में कैसे हो सकता है, किसान की जिंदगी को कैसे आसान बनाया जा सकता है, इसलिए मैंने इसमें काम किया.

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