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This Article is From Dec 26, 2011

अन्ना अनशन को तैयार, नेताओं ने की आलोचना

लोकपाल के मामले में सरकार पर गम्भीर नहीं होने का आरोप लगाते हुए अन्ना हजारे ने कहा कि वह मंगलवार से मुम्बई में तीन दिन का अनशन करेंगे।
रालेगण सिद्धि: प्रभावी लोकपाल विधेयक की मांग के लिए समाजसेवी अन्ना हजारे मुम्बई में मंगलवार से तीन दिवसीय अनशन के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। उधर सरकार ने उनके इस अनशन को असामयिक करार देते हुए कहा कि विधेयक के स्वरूप पर अंतिम निर्णय संसद करेगी। लोकपाल के मामले में सरकार पर गम्भीर नहीं होने का आरोप लगाते हुए समाज सेवी अन्ना हजारे ने सोमवार को कहा कि वह मंगलवार से मुम्बई में तीन दिन का अनशन करेंगे। मुम्बई रवाना होने से पहले अन्ना ने संवाददाताओं से कहा कि वह 29 दिसम्बर के बाद नई दिल्ली में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास के बाहर धरना देंगे। इस बीच राजनीतिक वर्ग का टीम अन्ना पर प्रहार जारी रहा। लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख रामविलास पासवान ने अन्ना के आंदोलन को 'भीड़तंत्र' की संज्ञा से विभूषित किया। पासवान ने राष्ट्रीय जनता दल के लालू प्रसाद यादव के बाद शायद सबसे कठोर हमला किया है। यादव ने संसद में बहस के दौरान टीम अन्ना पर निशाना साधा था। लोकपाल विधेयक पर अब संसद में जहां 27 से 29 दिसंबर तक चर्चा होगी वहीं अन्ना हजारे मुम्बई में अनशन करेंगे। यह विधेयक पिछले सप्ताह पेश किया गया था। इस विधेयक पर चर्चा के लिए सत्र की अवधि 27 से 29 दिसम्बर तक बढ़ाई गई। अन्ना ने स्पष्ट किया कि वह किसी पार्टी के खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने कहा, "यह किसी पार्टी अथवा व्यक्ति के खिलाफ नहीं है। हम 25 वर्ष से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे हैं।" अन्ना ने अपने पैतृक गांव में संवाददाताओं से कहा, "आजादी के 60 बरस में आपने कौन सा भ्रष्टाचार निरोधी कानून बनाया? सूचना का अधिकार कानून के लिए..हमें 10 वर्ष तक लड़ना पड़ा।" अन्ना ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को ईमानदार करार देते हुए सोनिया और राहुल पर बार-बार निशाना साधा है। उधर, केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने सोमवार को कहा कि सरकार सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे द्वारा प्रस्तावित लोकपाल विधेयक के असहमति वाले बिंदुओं से अवगत है लेकिन इस विधेयक का अंतिम स्वरूप संसद ही तय करेगी। मुखर्जी ने संवाददाताओं से कहा, "हम जानते हैं कि ऐसे कुछ बिंदु हैं लेकिन विधेयक की आखिरी सूरत क्या होगी यह संसद ही तय करेगी।" इस बीच सरकार ने अन्ना के अनशन को असामयिक बताते हुए कहा कि भ्रष्टाचार रोधी कानून का निर्माण संसद के विवेक पर छोड़ देना चाहिए। संसदीय कार्य राज्य मंत्री राजीव शुक्ला ने सोमवार को कहा, "सरकार ने पहले ही प्रभावशाली एवं मजबूत विधेयक लोक सभा में पेश कर दिया है। सभी लोग इसमें भागीदारी करेंगे। राजनीतिक दलों के विचार भी सामने आएंगे और विधेयक को मतदान के लिए रखा जाएगा।" उन्होंने कहा, "संसद को इस पर निर्णय करने के लिए छोड़ दें। मैं उनसे केवल इतना ही निवेदन करना चाहूंगा कि संसद के निर्णय का इंतजार करें।" दूसरे संसदीय कार्य राज्य मंत्री हरीश रावत ने कहा, "देश एवं समाज के सभी वर्गो के कल्याण को ध्यान में रखकर सभी सुझावों को जगह दी गई है। यदि कुछ छूट जाता है तो अन्नाजी एवं उनके साथियों को इसे संसद एवं सांसदों के विवेक पर छोड़ देना चाहिए।" इन सबसे बेपरवाह अन्ना मुम्बई के लिए चल दिए हैं। उनके सहयोगी अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अन्ना का आंदोलन संसद के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा, "सरकार लोगों के साथ विश्वासघात कर रही है। हम संसद से हाथ जोड़कर सशक्त लोकपाल विधेयक पारित करने का निवेदन कर रहे हैं।" अन्ना हजारे मुम्बई में तीन दिवसीय अनशन के बाद दिल्ली का रुख करेंगे जहां वह देशव्यापी 'जेल भरो' आंदोलन की शुरुआत करेंगे। उल्लेखनीय है कि इस साल अन्ना हजारे का यह चौथा अनशन होगा। अप्रैल में उन्होंने पहला अनशन किया था जिसके बाद लोकपाल राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना था।
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अनशन, अन्ना हजारे
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