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This Article is From Jun 08, 2025

या अल्लाह, टूरिस्ट भेज दे! आतंकी हमले के बाद कश्मीर में है पर्यटकों का इंतजार

टूरिज्म से जुड़े लोगों ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से हस्तक्षेप की अपील की है. उन्होंने कहा है कि हमारी गुज़ारिश है, पर्यटन को फिर से सांस लेने दो.

या अल्लाह, टूरिस्ट भेज दे! आतंकी हमले के बाद कश्मीर में है पर्यटकों का इंतजार
जम्मू कश्मीर में पर्यटकों का है इतंजार
नई दिल्ली:

22 अप्रैल को बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले को 44 दिन बीत चुके हैं. उस कायराना हमले में 26 निर्दोष नागरिक मारे गए थे. इस आतंकी हमले के बाद से ही पहलगाम समेत कश्मीर के ज्यादातर टूरिस्ट प्लेस विरान ही पड़े हैं. 
पहलगाम, जहां कभी टूरिस्टों की रौनक होती थी, आज बेरोज़गारी और मायूसी का चेहरा बन चुका है. NDTV ने मौजूदा हालात पर वहां के स्थानीय लोगों से बात की. 

पहलगाम के स्थानीय लोगों ने बताया कि वो चाहते हैं कि पहलगाम की वादियों में एक बार पर्यटक लौट आएं और सरकार पार्कों-उद्यानों को दोबारा खोले. आपको बता दें कि हमले के बाद एहतियात के तौर पर बेताब घाटी, अरु घाटी, चंदनवारी, शिकारगाह और कोलाहोई ग्लेशियर जैसे प्रमुख स्थलों को बंद कर दिया गया था. इसका नतीजा  ये हुआ कि सैकड़ों परिवारों की रोज़ी-रोटी छिन गई. एक स्थानीय दुकानदार ने हमे बताया कि उनकी कमाई ठप हो चुकी है. हफ्तों से एक पैसा नहीं कमाया। कुछ लोगों ने तो महीनेभर में ₹10 तक नहीं कमा सके हैं. 

यही हाल दूसरे व्यवसाय का भी है. चाहे बात टैक्सी चालकों की करें या फिर घुड़सवारों की या भी गाइड की. बगैर टूरिस्ट के सब बेहाल हैं. एक घोड़ेवाले ने बताया कि दिहाड़ी पर जीते हैं.टूरिस्ट ही हमारी ज़िंदगी हैं.उनके बिना हमारे घर चूल्हा नहीं जलता. हालात यह हैं कि जो गिनती के पर्यटक पहलगाम पहुंच भी रहे हैं,उन्हें भी सुरक्षा की वजहों से कई खूबसूरत जगहों पर जाने नही दिया जा रहा हैं.

टूरिज्म से जुड़े लोगों ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से हस्तक्षेप की अपील की है. उन्होंने कहा है कि हमारी गुज़ारिश है, पर्यटन को फिर से सांस लेने दो. स्थानीय लोगों का कहना है कि हाल ही में पहलगाम में हुई एक कैबिनेट बैठक में आश्वासन दिया गया था कि बंद क्षेत्रों को कुछ दिनों में खोल दिया जाएगा, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ.कश्मीर, जो कभी ‘धरती का स्वर्ग' कहलाता था, आज रोटी के लिए तरस रहा है.यहां हर हाथ दुआ में उठा है या अल्लाह, टूरिस्ट भेज दे… ताकि घाटी फिर जिए, फिर मुस्कराए. 

लेखक के बारे में
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राजीव रंजन
Editor - Defence & Political Affairs
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