Bengal Elections 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज है. राज्य में दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को वोटिंग होनी है. अभी राज्य में चुनाव प्रचार अभियान पूरे परवान पर है. बंगाल चुनाव का नब्ज समझने की कोशिश के तहत एनडीटीवी ने खास शो चाय स्टॉप में राज्य के कई वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषकों के साथ बातचीत की. इस बातचीत में राज्य के मूड को समझने की कोशिश की गई. हावड़ा में गंगा नदी में चलती बोट में बैठे बंगाल के वरिष्ठ पत्रकारों ने इस चुनाव से जुड़े अपने अनुभव NDTV के एडिटर इन चीफ राहुल कंवल के साथ साझा किए.
'NDTV चाय स्टॉप' के इस खास शो में पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ पत्रकार अभिजीत दासगुप्ता, 45 साल से बंगाल में पत्रकारिता कर रहे जयंतो घोषाल, राजनीतिक विश्लेषक मोमिका चक्रवती, तौसीफ अहमद खान के साथ-साथ सीनियर जर्नलिस्ट महुआ चटर्जी, मनोज्ञा लोईवाल और रितिक मंडल शामिल हुए.

हावड़ा में गंगा नदी पर चलते बोट पर बंगाल चुनाव पर चर्चा करते राजनीतिक विश्लेषक.
बंगाल चुनाव के फाइव एम फैक्टर
- महिला
- माइनॉरिटी
- मशीनरी
- मसल और मनी
- ममता या मोदी
महिलाः चुनाव चाहे किसी भी राज्य का हो, महिलाओं का वोट नतीजे तय करने का एक बड़ा जरिया होती है. बंगाल में भी महिलाओं के मत रिजल्ट डिसाइड करने वाले है. अभी तक हुए बंगाल के चुनाव में महिलाओं को वोट ममता बनर्जी के साथ रहा है. लेकिन इस बार बीजेपी ममता के इस वोट बैंक में सेंध लगाने की जुगत में लगी है.
राज्य का पिछला चुनावी इतिहास बताता है कि महिलाओं ममता के साथ हैं. लेकिन इस बार क्या बीजेपी में महिलाओं का वोटबैंक तोड़ पाने में सफल होगी, यह कहना अभी मुश्किल है.
माइनॉरिटी: बंगाल चुनाव में अल्पसंख्यकों का वोट एक बड़ा फैक्टर हैं. जो बीते कुछ चुनाव से ममता के साथ जुड़ा है. ममता बनर्जी के इस कोर वोट बैंक में एसआईआर के जरिए फर्क पड़ने की बात सभी जानकारों ने कहा. लेकिन एसआईआर का फैक्टर कितना बड़ा है, यह देखने वाली बात होगी.
Election Adda on the @ndtv #ChaiStop Onboard a steamer. Sailing down the Ganga with the Howrah bridge as the backdrop. Terrific setting and surprisingly pleasant weather served as the perfect ingredients for an engaging chat on the West Bengal elections. This is not a normal… pic.twitter.com/ACrpKirmgS
— Rahul Kanwal (@rahulkanwal) April 17, 2026
मशीनरी: मशीनरी के मामले में टीएमसी बीस है. राज्य की तमाम मशीनरी टीएमसी के कंट्रोल में है. लेकिन चुनाव से पहले बड़े पैमाने पर अधिकारियों के तबादले से ममता की यह मशीनरी कमजोर हुई है. एनडीटीवी चॉय स्टॉप चर्चा में राज्य के वरिष्ठ पत्रकार जयंतो घोषाल ने कहा, चुनाव पूर्व छोटे-बड़े कई अधिकारी बदल दिए गए, गर्वनर बदल दिए गए. एक अधिकारी का नाम नहीं बताने की शर्त पर जयंतो ने कहा कि वो मुझसे कह रहे थे, मैं बहुत दुविधा में हूं. सीएम की बात मानूं या चुनाव आयोग की.
मनी-मसल: इस मामले में बीजेपी कमोवेश आगे है. लेकिन बंगाल के भ्रदलोक पर मनी और मसल का असर कितना ज्यादा होता है, यह चुनावी नतीजे तय करेंगे. अन्य राज्यों की तुलना में बंगाल में वोटिंग पैटर्न अलग होता है. यहां के वोटर सायलेंट होते हैं. अब देखना है कि इस बार नतीजा क्या होता है?
ममता या मोदी: बंगाल की लड़ाई में दोनों प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों का यह ट्रंप कार्ड है. मनोज्ञा लोईवाल ने कहा- ममता बनर्जी का जवाब नहीं है, सायलेंट कैंपेन चल रहा है. मोदी ने अभी तक जितनी रैली की उसमें ममता का नाम तक नहीं लिया. दूसरी ओर बीजेपी के लिए मोदी तुरुप का इक्का, यह कितना काम करेगा, देखने वाली बात होगी.
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