एनडीटीवी से बातचीत के दौरान लोगों ने अपनी नाराजगी का कारण बताया
उत्तर प्रदेश में पांच साल तक सत्ता में रही भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रत्याशियों के विरोध के कई वीडियो मुजफ्फऱ नगर से लेकर शामली तक से आ रहे हैं. कुछ प्रत्याशियों का जहां पांच साल निष्क्रिय रहने को लेकर विरोध किया जा रहा है, वहीं कुछ प्रत्याशी का विरोध क्षेत्र में विकासकार्य नहीं होने के कारण किया जा रहा है. गन्ना किसानों के भुगतान में देर का मुद्दा भी विरोध का कारण बना हुआ है. मुजफ्फर नगर में पुरकाज़ी विधानसभा के बीजेपी उम्मीदवार प्रमोद ऊंटवाल जब प्रचार के लिए निकले तो लोगों ने पूछा 'कहां थे 5 साल?'इससे पहले मुजफ्फर नगर में ही खतौली के मुनव्वर पुर गांव में वे जैसे ही पहुंचे, इनका विरोध शुरू हो गया.2017 में इन्हीं लोगों ने इनको चुनकर भेजा था... विकास कार्य न होने से ग्रामीण नाराज थे हालांकि विधायक ने कहा,' विरोध करने वाले ब विरोधी पार्टी के थे. खतौली विधानसभा के बीजेपी उम्मीदवार विक्रम सैनी ने कहा, 'मेरे कुछ विरोधी थे, गांव में उन्होंने ये सब कराया था.'
सिर्फ मुजफ्फरनगर ही नहीं शामली के कांडला गांव में बीजेपी उम्मीदवार तेजिंदर नरवाल के खिलाफ भी नारेबाजी हुई. हालांकि निरवाल विरोध की बात से इंकार करते है. उन्होंने कहा, 'नहीं, कोई विरोध नहीं हुआ.लेकिन इन विरोध का कारण जानने हम शामिली के कांडला गांव पहुंचे. गन्ना भुगतान, किसान आंदोलन और गांव में विकास न होने के कारण ग्रामीण नाराज दिखे. उन्होंने कहा, 'हमने तेजेंदर निरवाल का विरोध नहीं बल्कि बीजेपी विधायक का विरोध किया है. उनको हम लोगों से बात करनी चाहिए थी लेकिन निकल गए.' ग्रामीणों की शिकायत है कि गन्ने का भुगतान नहीं हुआ और आवारा पशुओं के चलते गिन रात खेत में ही कटे हैं. हालांकि पश्चिमी यूपी में स्थानीय स्तर पर नाराजगी को देखते हुए बीजेपी ने 20 सिटिंग विधायकों की टिकट भी काटी है. इस रणनीति के पीछे कोशिश यही है कि विधायकों के प्रति लोगों की नाराजगी को टाला जाए.
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