अगरतला:
वाम मोर्चा त्रिपुरा विधानसभा में शानदार जीत हासिल करते हुए राज्य में पांचवीं बार सत्तासीन होने जा रहा है। गुरुवार को आए चुनाव परिणाम ने सबको चौंका दिया है। वाम मोर्चे ने विधानसभा की 60 में से 50 पर कब्जा जमा लिया है जबकि प्रतिपक्षी कांग्रेस को महज 10 सीटों से संतोष करना पड़ा।
चुनाव परिणाम सामने आने के बाद वामपंथी पार्टियों, खासकर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के कार्यकर्ता पूरे राज्य में उत्सव मना रहे हैं, जबकि कांग्रेस के खेमे में सन्नाटा पसरा हुआ है।
माकपा ने 49 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि उसकी सहयोगी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने एक सीट पर जीत हासिल की है।
1978 के बाद वाम मोर्चा के लिए इस बार का परिणाम बेहतर साबित हुआ है। 1978 में मोर्चा ने 56 सीटों पर जीत हासिल की थी। 2008 के विधानसभ चुनाव के मुकाबले मोर्चा ने इस बार एक सीट ज्यादा जीती है।
जीत से प्रसन्न मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने कहा, "लोगों ने विकास, शांति और स्थायित्व के अलावा सुशासन के पक्ष में मतदान किया।"
वर्ष 1998 से ही राज्य में शासन चला रहे 64 वर्षीय माणिक सरकार धानपुर सीट से छठी बार जीते हैं। वे अकेले ऐसे नेता हैं जो चौथी बार त्रिपुरा के मुख्यमंत्री पद पर काबिज होंगे।
कांग्रेस जहां मात्र 10 सीटें बरकरार रखने में कामयाब रही, वहीं उसकी सहयोगी इंडीजीनस नेशनलिस्ट पार्टी ऑफ त्रिपुरा (आईएनपीटी) को निराशा हाथ लगी है। पांच साल पहले इसने एक सीट पर जीत हासिल की थी।
तृणमूल कांग्रेस ने 2008 में 22 प्रत्याशी मैदान में उतारे थे, लेकिन गैर वामो मतों के विभाजन को रोकने के लिए इस बार के चुनाव में उसने एक भी प्रत्याशी खड़ा नहीं किया। उसके 'बैकफुट' पर जाने का भी हालांकि कांग्रेस को फायदा नहीं मिल पाया।
शिक्षक से राजनेता बने 75 वर्षीय अनिल सरकार कवि और लेखक भी हैं। उन्होंने नौवीं बार चुनाव जीतकर रिकॉर्ड कायम किया। वह माकपा के टिकट पर पश्चिमी त्रिपुरा के प्रतापगढ़ से फिर निर्वाचित हुए हैं।
उल्लेखनीय है कि त्रिपुरा में वाम मोर्चा 1978 से ही सत्ता पर काबिज है। यह मोर्चा सिर्फ एक बार (1988-93 के दौरान) सत्ता से दूर रहा था।
चुनाव परिणाम सामने आने के बाद वामपंथी पार्टियों, खासकर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के कार्यकर्ता पूरे राज्य में उत्सव मना रहे हैं, जबकि कांग्रेस के खेमे में सन्नाटा पसरा हुआ है।
माकपा ने 49 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि उसकी सहयोगी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने एक सीट पर जीत हासिल की है।
1978 के बाद वाम मोर्चा के लिए इस बार का परिणाम बेहतर साबित हुआ है। 1978 में मोर्चा ने 56 सीटों पर जीत हासिल की थी। 2008 के विधानसभ चुनाव के मुकाबले मोर्चा ने इस बार एक सीट ज्यादा जीती है।
जीत से प्रसन्न मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने कहा, "लोगों ने विकास, शांति और स्थायित्व के अलावा सुशासन के पक्ष में मतदान किया।"
वर्ष 1998 से ही राज्य में शासन चला रहे 64 वर्षीय माणिक सरकार धानपुर सीट से छठी बार जीते हैं। वे अकेले ऐसे नेता हैं जो चौथी बार त्रिपुरा के मुख्यमंत्री पद पर काबिज होंगे।
कांग्रेस जहां मात्र 10 सीटें बरकरार रखने में कामयाब रही, वहीं उसकी सहयोगी इंडीजीनस नेशनलिस्ट पार्टी ऑफ त्रिपुरा (आईएनपीटी) को निराशा हाथ लगी है। पांच साल पहले इसने एक सीट पर जीत हासिल की थी।
तृणमूल कांग्रेस ने 2008 में 22 प्रत्याशी मैदान में उतारे थे, लेकिन गैर वामो मतों के विभाजन को रोकने के लिए इस बार के चुनाव में उसने एक भी प्रत्याशी खड़ा नहीं किया। उसके 'बैकफुट' पर जाने का भी हालांकि कांग्रेस को फायदा नहीं मिल पाया।
शिक्षक से राजनेता बने 75 वर्षीय अनिल सरकार कवि और लेखक भी हैं। उन्होंने नौवीं बार चुनाव जीतकर रिकॉर्ड कायम किया। वह माकपा के टिकट पर पश्चिमी त्रिपुरा के प्रतापगढ़ से फिर निर्वाचित हुए हैं।
उल्लेखनीय है कि त्रिपुरा में वाम मोर्चा 1978 से ही सत्ता पर काबिज है। यह मोर्चा सिर्फ एक बार (1988-93 के दौरान) सत्ता से दूर रहा था।
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