
पुणे:
भारतीय जनता पार्टी ने आज मांग की है कि 4,000 करोड़ रुपये के वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदे में भ्रष्टाचार की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराई जाए।
बीजेपी प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि यह जांच तभी समय पर पूरी हो पाएगी और नतीजा दे पाएगी, जब इसकी निगरानी सुप्रीम कोर्ट कर रहा हो, वरना यह लीपा-पोती बनकर रह जाएगी।
उल्लेखनीय है कि सीबीआई इस मामले में इस बात की जांच कर रही है कि इटली की कंपनी फिनमेकानिका से इस सौदे को मूर्त रूप देने के लिए किसी भारतीय अधिकारी को रिश्वत दी गई थी या नहीं। इस बीच, सरकार ने इस कंपनी को होने वाले बकाया तकरीबन 24 सौ करोड़ रुपये के भुगतान पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह रोक तब तक लगी रहेगी जब तक सीबीआई जांच के परिणाम नहीं आते।
वहीं, इस मुद्दे पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस ने कहा है कि टेंडर की शर्तों में 2003 में बदलाव हुए, जब बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार सत्ता में थी और ब्रजेश मिश्रा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार थे। वहीं, बीजेपी का कहना है कि ब्रजेश मिश्रा ने स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप यानी एसपीजी की सलाह पर बदलाव की मांगें की थीं, क्योंकि जिन वीवीआईपी लोगों के लिए ये हेलीकॉप्टर खरीदे जाने थे, उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी एसपीजी पर ही है।
बीजेपी का यह भी कहना है कि हेलीकॉप्टर के सौदे पर 2010 में हस्ताक्षर हुए, जिस वक्त कांग्रेस नीत यूपीए सरकार सत्ता में थी और इसलिए सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए और सौदे से फायदा उठाने वाले लोगों के नाम जाहिर करने चाहिए।
बीजेपी प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि यह जांच तभी समय पर पूरी हो पाएगी और नतीजा दे पाएगी, जब इसकी निगरानी सुप्रीम कोर्ट कर रहा हो, वरना यह लीपा-पोती बनकर रह जाएगी।
उल्लेखनीय है कि सीबीआई इस मामले में इस बात की जांच कर रही है कि इटली की कंपनी फिनमेकानिका से इस सौदे को मूर्त रूप देने के लिए किसी भारतीय अधिकारी को रिश्वत दी गई थी या नहीं। इस बीच, सरकार ने इस कंपनी को होने वाले बकाया तकरीबन 24 सौ करोड़ रुपये के भुगतान पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह रोक तब तक लगी रहेगी जब तक सीबीआई जांच के परिणाम नहीं आते।
वहीं, इस मुद्दे पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस ने कहा है कि टेंडर की शर्तों में 2003 में बदलाव हुए, जब बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार सत्ता में थी और ब्रजेश मिश्रा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार थे। वहीं, बीजेपी का कहना है कि ब्रजेश मिश्रा ने स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप यानी एसपीजी की सलाह पर बदलाव की मांगें की थीं, क्योंकि जिन वीवीआईपी लोगों के लिए ये हेलीकॉप्टर खरीदे जाने थे, उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी एसपीजी पर ही है।
बीजेपी का यह भी कहना है कि हेलीकॉप्टर के सौदे पर 2010 में हस्ताक्षर हुए, जिस वक्त कांग्रेस नीत यूपीए सरकार सत्ता में थी और इसलिए सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए और सौदे से फायदा उठाने वाले लोगों के नाम जाहिर करने चाहिए।
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