
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को कहा कि लोगों को उतना ही बोलना चाहिए, जितना वे करके दिखा सकते हैं, वरना चीजें खराब हो सकती हैं।
पीएम मोदी पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए नीतीश कुमार ने एक लतीफे का जिक्र किया, जिसमें कहा गया है कि उनके पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह पर नहीं बोलने का आरोप था, जबकि मोदी मुश्किल से सुनते हैं।
बिहार में सामाजिक क्षेत्रों में प्रगति का जिक्र करते हुए नीतीश ने कहा, ये सब चीजें सिर्फ बातें करने से नहीं हो जातीं। अगर वैसा संभव हो पाता, तो इस देश में कई शीर्ष सुवक्ता हैं। बोलना एक बात है और करके दिखाना अलग बात।
नीतीश ने मोदी का नाम लिए बिना कहा, मैंने व्हाट्सएप पर एक जोक सुना कि पूर्ववर्ती (प्रधानमंत्री) नहीं बोलेंगे और मौजूदा नहीं सुनेंगे। सिर्फ बोलने से कुछ नहीं होता। आपको इसे करना होता है। उतना ही बोलें जितना आप कर सकते हैं। आप जितना कर सकते हैं, उससे ज्यादा बोलते हैं, तो एक दिन आप पटरी से उतर जाएंगे।
बिहार में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं जहां नीतीश का मुकाबला बीजेपी से है। नीतीश ने कहा कि वह वास्तव में जितना कर सकते हैं, हमेशा उससे कम बोलने में उन्होंने विश्वास किया है।
जेडीयू नेता ने राज्य में 2005 में शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र की 'ध्वस्त' स्थिति की आलोचना की, जब वह लालू प्रसाद की पार्टी आरजेडी को हराकर सत्ता में आए थे। लेकिन अपने पूर्व प्रतिद्वंद्वी के साथ गठबंधन के बारे में पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया।
बिहार विकास संवाद को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह किसी पार्टी से जुड़ा हुआ नहीं है और यह इस संबंध में एक दृष्टि पेश करेगा कि 2025 तक राज्य कैसा होना चाहिए। उन्होंने इस विचार को खारिज कर दिया कि केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार की स्थिति बिहार के लिए बेहतर रहेगी। बीजेपी नीत एनडीए यह विचार पेश कर रहा है।
पीएम मोदी पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए नीतीश कुमार ने एक लतीफे का जिक्र किया, जिसमें कहा गया है कि उनके पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह पर नहीं बोलने का आरोप था, जबकि मोदी मुश्किल से सुनते हैं।
बिहार में सामाजिक क्षेत्रों में प्रगति का जिक्र करते हुए नीतीश ने कहा, ये सब चीजें सिर्फ बातें करने से नहीं हो जातीं। अगर वैसा संभव हो पाता, तो इस देश में कई शीर्ष सुवक्ता हैं। बोलना एक बात है और करके दिखाना अलग बात।
नीतीश ने मोदी का नाम लिए बिना कहा, मैंने व्हाट्सएप पर एक जोक सुना कि पूर्ववर्ती (प्रधानमंत्री) नहीं बोलेंगे और मौजूदा नहीं सुनेंगे। सिर्फ बोलने से कुछ नहीं होता। आपको इसे करना होता है। उतना ही बोलें जितना आप कर सकते हैं। आप जितना कर सकते हैं, उससे ज्यादा बोलते हैं, तो एक दिन आप पटरी से उतर जाएंगे।
बिहार में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं जहां नीतीश का मुकाबला बीजेपी से है। नीतीश ने कहा कि वह वास्तव में जितना कर सकते हैं, हमेशा उससे कम बोलने में उन्होंने विश्वास किया है।
जेडीयू नेता ने राज्य में 2005 में शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र की 'ध्वस्त' स्थिति की आलोचना की, जब वह लालू प्रसाद की पार्टी आरजेडी को हराकर सत्ता में आए थे। लेकिन अपने पूर्व प्रतिद्वंद्वी के साथ गठबंधन के बारे में पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया।
बिहार विकास संवाद को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह किसी पार्टी से जुड़ा हुआ नहीं है और यह इस संबंध में एक दृष्टि पेश करेगा कि 2025 तक राज्य कैसा होना चाहिए। उन्होंने इस विचार को खारिज कर दिया कि केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार की स्थिति बिहार के लिए बेहतर रहेगी। बीजेपी नीत एनडीए यह विचार पेश कर रहा है।
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