
शरद यादव का विवादित बयान...
पटना:
बिहार में जेडीयू के नेता शरद यादव ने बेटियों को लेकर विवादित बयान दिया है. उन्होंने वोट की इज्जत को बेटियों की इज्जत से बड़ा बताया है. उनके इस बयान की चारों तरफ निंदा हो रही है. वह पटना में एक कार्यक्रम के दौरान वह वोट के महत्व के बारे में बता रहे थे. उन्होंने कहा कि लोगों को बैलट पेपर के बारे में समझाने की जरूरत है. बेटी की इज्जत से वोट की इज्जत बड़ी है. बेटी की इज्जत जाएगी तो गांव और मोहल्ले की इज्जत जाएगी, अगर वोट बिक गया तो देश की इज्जत जाएगी.
69 साल के अनुभवी नेता शरद यादव संसद के लिए कई बार चुने गए. वह राजनीति के गिरते स्तर और पैसे-वोट के गठजोड़ पर चिंता जता रहे थे. उन्होंने आरोप लगाया दक्षिण में किस तरह 30 करोड़ खर्च करके कोई भी सांसद बन जाता है और 10 करोड़ खर्च करके विधायक.
शरद यादव की यह टिप्पणी तब आई है जब पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के लिए मतदान होने वाला है. शरद यादव इससे पहले भी संसद के भीतर और बाहर अपनी टिप्पणियों से सीएम नीतीश कुमार को मुसीबत में डाल चुके हैं.
2015 में बीमा विधेयक पर चर्चा के दौरान शरद यादव ने दक्षिण भारतीय महिलाओं की स्किन के कलर पर टिप्पणी की थी. उन्होंने कहा था कि भारतीयों को गोरे रंग के प्रति आसक्ति है. तभी तो विदेशी निवेश की पैरवी की जा रही है. यहां तो शादी के लिए छपने वाले विज्ञापनों में भी गोरी दुल्हन की चाहत की जाती है. उनके इस बयान की भी काफी निंदा हुई थी.
इस पर बिहार की राजनीति गर्मा गई है. राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जहां शरद यादव पर जमकर निशाना साधा, वहीं सत्ताधारी जद (यू) अपने पूर्व अध्यक्ष के बचाव में उतर गई है. भाजपा ने निशाना साधते हुए कहा कि ऐसे बयान लड़कियों और महिलाओं के प्रति उस पार्टी के दृष्टिकोण को दिखाता है. भाजपा के विधान पार्षद विनोद नारायण झा ने कहा, मंगलवार को एक ओर देश के लोग जहां राष्ट्रीय बालिका दिवस मना रहे थे, किसी नेता का ऐसा बयान देना कहीं से भी सुखद नहीं है. ऐसे बयानों की जितनी निंदा की जाए कम है. इधर, जद (यू) शरद यादव के बचाव में उतर आई है. जद (यू) के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि पूर्व अध्यक्ष के बयान को बड़े परिप्रेक्ष्य में देखने की जरूरत है, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भाषा की मर्यादा सभी को रखनी चाहिए.
(इनपुट्स एजेंसी से भी)
69 साल के अनुभवी नेता शरद यादव संसद के लिए कई बार चुने गए. वह राजनीति के गिरते स्तर और पैसे-वोट के गठजोड़ पर चिंता जता रहे थे. उन्होंने आरोप लगाया दक्षिण में किस तरह 30 करोड़ खर्च करके कोई भी सांसद बन जाता है और 10 करोड़ खर्च करके विधायक.
शरद यादव की यह टिप्पणी तब आई है जब पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के लिए मतदान होने वाला है. शरद यादव इससे पहले भी संसद के भीतर और बाहर अपनी टिप्पणियों से सीएम नीतीश कुमार को मुसीबत में डाल चुके हैं.
2015 में बीमा विधेयक पर चर्चा के दौरान शरद यादव ने दक्षिण भारतीय महिलाओं की स्किन के कलर पर टिप्पणी की थी. उन्होंने कहा था कि भारतीयों को गोरे रंग के प्रति आसक्ति है. तभी तो विदेशी निवेश की पैरवी की जा रही है. यहां तो शादी के लिए छपने वाले विज्ञापनों में भी गोरी दुल्हन की चाहत की जाती है. उनके इस बयान की भी काफी निंदा हुई थी.
इस पर बिहार की राजनीति गर्मा गई है. राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जहां शरद यादव पर जमकर निशाना साधा, वहीं सत्ताधारी जद (यू) अपने पूर्व अध्यक्ष के बचाव में उतर गई है. भाजपा ने निशाना साधते हुए कहा कि ऐसे बयान लड़कियों और महिलाओं के प्रति उस पार्टी के दृष्टिकोण को दिखाता है. भाजपा के विधान पार्षद विनोद नारायण झा ने कहा, मंगलवार को एक ओर देश के लोग जहां राष्ट्रीय बालिका दिवस मना रहे थे, किसी नेता का ऐसा बयान देना कहीं से भी सुखद नहीं है. ऐसे बयानों की जितनी निंदा की जाए कम है. इधर, जद (यू) शरद यादव के बचाव में उतर आई है. जद (यू) के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि पूर्व अध्यक्ष के बयान को बड़े परिप्रेक्ष्य में देखने की जरूरत है, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भाषा की मर्यादा सभी को रखनी चाहिए.
(इनपुट्स एजेंसी से भी)
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