
रेल बजट को 24 घंटे भी नहीं बीते कि सुप्रीम कोर्ट ने भी रेलवे से कई सवाल पूछ डाले। एक याचिका की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे को कहा कि भले ही आपको बजट की दिक्कत हो, लेकिन आपको मानवरहित क्रासिंग पर हो रही मौतों को रोकने लिए ठोस कदम उठाने ही होंगे।
कोर्ट ने कहा कि ऐसा नहीं है कि हर क्रासिंग पर हादसे होते हैं, कुछ क्रासिंग ऐसी हैं, जहां ऐसे हादसे हो रहे हैं, जो खतरनाक हैं। रेलवे को ऐसी खतरनाक क्रासिंग का पता लगाकर कोर्ट को बताना चाहिए। इसके अलावा जहां नई पटरियां बिछाने की योजना है, वहां पहले से ही इसके लिए इंतजाम किए जाने चाहिए।
हालांकि सुनवाई के दौरान रेलवे की ओर से वकील ने कहा कि प्रशासन इस दिशा में काम कर रहा है और मानवरहित क्रॉसिंग को लेकर बजट में भी प्रावधान रखा गया है। वहीं याचिकाकर्ता ने दलील दी कि सालों से रेलवे इस दिशा में लापरवाही बरत रहा है। यही कारण है कि ऐसी क्रासिंग पर हजारों लोग अपनी जान गवां चुके हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे को निर्देश दिए कि वह पांच हफ्तों में इस मामले में कोई ठोस रणनीति तैयार कर कोर्ट को रिपोर्ट सौंपे।
जनहित याचिका में कहा गया है कि देशभर में करीब 13,500 मानवरहित क्रॉसिंग हैं, जिनकी वजह से आए दिन ट्रेन दुर्घटनाएं हो रही हैं।
याचिका में कहा गया है कि पिछले 25 सालों में करीब पांच हजार लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया गया है कि वह रेलवे को ऐसी क्रासिंग पर सुरक्षा के इंतजाम पुख्ता करने को कहे।
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