संयुक्त किसान मोर्चा 6 मार्च को काले झंडे लगाकर विरोध प्रदर्शन करेगा

6 मार्च को दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के विरोध प्रदर्शन के 100 दिन पूरे होंगे, इस दिन केएमपी एक्सप्रेसवे पर 5 घंटे की नाकाबंदी होगी

संयुक्त किसान मोर्चा 6 मार्च को काले झंडे लगाकर विरोध प्रदर्शन करेगा

संयुक्त किसान मोर्चा के नेता दर्शन पाल.

नई दिल्ली:

Farmers Movement: संयुक्त किसान मोर्चा (Sanyukta Kisan Morcha) ने आज सिंघु बॉर्डर पर एक आम बैठक आयोजित की. आगामी दिनों के कार्यक्रम के लिए इसमें कई निर्णय लिए गए. 6 मार्च को दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन शुरू होने के 100 दिन हो जाएंगे. उस दिन दिल्ली व दिल्ली सीमा के विभिन्न विरोध स्थलों को जोड़ने वाले केएमपी एक्सप्रेसवे पर 5 घंटे की नाकाबंदी होगी. सुबह 11 से शाम 4 बजे के बीच जाम किया जाएगा. यहां टोल प्लाजा को टोल फीस जमा करने से भी मुक्त किया जाएगा. शेष भारत में आंदोलन को समर्थन के लिए और सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए घरों और कार्यालयों पर काले झंडे लहराए जाएंगे. संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रदर्शनकारियों से उस दिन काली पट्टी बांधने का आह्वान किया है.

संयुक्त किसान मोर्चा 8 मार्च को महिला किसान दिवस के रूप में मनाएगा. देश भर के सभी संयुक्त किसान मोर्चे के धरना स्थल 8 मार्च को महिलाओं द्वारा संचालित होंगे. इस दिन महिलाएं ही मंच प्रबंधन करेंगी और वक्ता होंगी. एसकेएम ने उस दिन महिला संगठनों और अन्य लोगों को आमंत्रित किया है कि वे किसान आंदोलन के समर्थन में इस तरह के कार्यक्रम करें और देश में महिला किसानों के योगदान को उजागर करें.

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर 15 मार्च को 'निजीकरण विरोधी दिवस' का समर्थन करते हुए संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे. एसकेएम इस दिन को 'कॉरपोरेट विरोधी' दिवस के रूप में देखते हुए ट्रेड यूनियनों के इस आह्वान का समर्थन करेगा, और एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा.


जिन राज्यों में अभी चुनाव होने वाले है, उन राज्यो में SKM भारतीय जनता पार्टी (BJP) को किसान-विरोधी, गरीब-विरोधी नीतियों के लिए दंडित करने की जनता से अपील करेगा.  एसकेएम के प्रतिनिधि भी इस उद्देश्य के लिए इन राज्यों का दौरा करेंगे और विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेंगे.

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SKM पूरे भारत में "एक MSP दिलाओ अभियान" शुरू करेगा.  अभियान के तहत, विभिन्न बाजारों में किसानों की फसलों की कीमत की वास्तविकता को दिखाया जाएगा, जो मोदी सरकार व एमएसपी के झूठे दावों और वादों को उजागर करेगा.  यह अभियान दक्षिण भारतीय राज्यों कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में शुरू किया जाएगा. पूरे देश में किसान इस अभियान में शामिल किए जाएंगे.