
मुंबई:
मुंबई में एक पिता को अपने बेटे की आख़िरी निशानी के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। एक निजी विमान कंपनी में पायलट सौमिक चटर्जी की सड़क हादसे में मौत हो गई, लेकिन पिता को पुलिस ने वे चीजें अब तक नहीं सौंपी हैं, जिससे वह अपने बेटे की यादें सहेज सकें। जिन चीजों में उनके लिए बेटा बसता है, वह अस्पताल और पुलिस स्टेशन की जाने किस दराज में गुम गई हैं और उसकी तलाश ही शायद इस बूढ़े बाप की जिंदगी का 'सारांश' बन गई है।
आलोक चटर्जी का 28 वर्षीय बेटा सौमिक पेशे से पायलट था और बेंगलुरू के लिए जहाज उड़ाने घर से निकला था, लेकिन सड़क हादसे में उसकी मौत हो गई। उसे गुज़रे महीनों बीत चुके हैं। इस बुजुर्ग पिता ने बेटा तो खो दिया अब उन्हें कम से कम अपने बेटे की आखिरी निशानी चाहिए। आलोक चटर्जी कहते हैं, 'बेटे की यूनिफार्म, मैडल, घड़ी और उसकी पेन जो आखिरी वक़्त में उसने पहने थे, उसे फैमिली म्यूजियम में रखूंगा। पुलिस कहती है चीज़ें अस्पताल के पास है, जबकि अस्पताल का कहना है कि पुलिस को दे दिया।'
आलोक मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया से लेकर राज्य के मुख्य सचिव तक चक्कर काट रहे हैं और पुलिस अब तक पिता को जज्बातों की ही तफ्तीश कर रही है। मुंबई पुलिस के डीसीपी धनंजय कुलकर्णी कहते हैं, 'हमने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। सभी चीज़ें ढूंढ़ने की कोशिश जारी है। इस मामले में जांच अधिकारी की लापरवाही को देखते हुए उसका इन्क्रीमेंट एक साल के लिए रोक दिया गया है।
सालों पहले 'सारांश' नाम की एक फिल्म आई थी, जिसमें बूढ़ा बाप अपने बेटे की अस्थियों के लिए जूझ रहा था। इस कहानी में सिर्फ पात्र बदले हैं, लेकिन इस मामले में भी प्रशासन की संवदेनशून्यता वैसी ही दिखती है।
आलोक चटर्जी का 28 वर्षीय बेटा सौमिक पेशे से पायलट था और बेंगलुरू के लिए जहाज उड़ाने घर से निकला था, लेकिन सड़क हादसे में उसकी मौत हो गई। उसे गुज़रे महीनों बीत चुके हैं। इस बुजुर्ग पिता ने बेटा तो खो दिया अब उन्हें कम से कम अपने बेटे की आखिरी निशानी चाहिए। आलोक चटर्जी कहते हैं, 'बेटे की यूनिफार्म, मैडल, घड़ी और उसकी पेन जो आखिरी वक़्त में उसने पहने थे, उसे फैमिली म्यूजियम में रखूंगा। पुलिस कहती है चीज़ें अस्पताल के पास है, जबकि अस्पताल का कहना है कि पुलिस को दे दिया।'
आलोक मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया से लेकर राज्य के मुख्य सचिव तक चक्कर काट रहे हैं और पुलिस अब तक पिता को जज्बातों की ही तफ्तीश कर रही है। मुंबई पुलिस के डीसीपी धनंजय कुलकर्णी कहते हैं, 'हमने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। सभी चीज़ें ढूंढ़ने की कोशिश जारी है। इस मामले में जांच अधिकारी की लापरवाही को देखते हुए उसका इन्क्रीमेंट एक साल के लिए रोक दिया गया है।
सालों पहले 'सारांश' नाम की एक फिल्म आई थी, जिसमें बूढ़ा बाप अपने बेटे की अस्थियों के लिए जूझ रहा था। इस कहानी में सिर्फ पात्र बदले हैं, लेकिन इस मामले में भी प्रशासन की संवदेनशून्यता वैसी ही दिखती है।
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