नई दिल्ली:
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि राज्यपाल अपने आदेश का विस्तार कर आरोपी व्यक्तियों को इस आधार पर माफी नहीं दे सकते कि वे बेगुनाह थे। पंजाब के राज्यपाल ने आजीवन कारावास की सजा काट रहे तीन व्यक्तियों की सजा को माफ कर उन्हें रिहा करने की संस्तुति की थी जिसे उच्चतम न्यायालय ने खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा कि राष्ट्रपति और राज्यपालों के पास दोषी ठहराये गए व्यक्तियों को माफी देने का विशेष संवैधानिक अधिकार है लेकिन इसे किसी की बेगुनाही निर्धारित करने के लिए प्रयोग नहीं किया जा सकता क्योंकि यह स्पष्ट रूप से अदालतों का अधिकार क्षेत्र है। अदालत ने कहा, किसी को किसी अन्य के अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन नहीं करना चाहिए। राज्यपाल का यह आदेश जिसमें उन्होंने आरोपी को बेगुनाह करार दिया है, संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत प्रदत सीमा का उल्लंघन है।
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राज्यपाल, उच्चतम न्यायालय