
फाइल फोटो
नई दिल्ली:
दिल्ली विधानसभा में सरकार ने वैट संशोधन विशेयक पेश किया है जिसके मुताबिक़ अब 11 उत्पाद के ऊपर वैट की दर बढ़ाने का या घटाने का फैसला कैबिनेट को लेने का अधिकार दे दिया है। यानी इन उत्पाद पर वैट कितना हो ये निर्णय लेने के लिए सरकार को विधानसभा में आने की ज़रूरत नहीं होगी।
जो 11 सामान इस लिस्ट में हैं उनमें पेट्रोल, मोमबत्ती, शराब, पांच हज़ार से ऊपर की घड़ी, कोल्ड ड्रिंक, लॉटरी टिकट, तम्बाकू और गुटखा हैं। इन सभी पर अभी वैट की अधिकतम सीमा 20 फीसदी है। इसका मतलब है कि सरकार फिलहाल इन सामानों पर ज्यादा से ज्यादा 20 फीसदी की दर से वैट लग सकता है। लेकिन सरकार अब कैबिनेट के ज़रिये कभी भी इसको 30 फीसदी तक करने का फैसला लेने के लिए अधिकृत हो गयी।
दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि सरकार अपनी ही बात में विरोधाभास कर रही है और दोहरी बात करके झूठ बोल रही है। गुप्ता के मुताबिक़ सरकार ने बजट में कहा था कि वैट की दर नहीं बढ़ेंगी और अब सरकार ये बढ़ा रही है और हम इसकी निंदा करते हैं।
दिल्ली के डिप्टी सीएम और वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि महंगाई बढ़ने या वैट बढ़ने का प्रस्ताव नहीं है, ये केवल वैट के रेट को लचीला बनाने के लिए किया जा रहा है और कोई भी रेट में बढ़ोतरी या कटौती पूरी स्टडी के बाद होगी, अभी वैट बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
असल में दिल्ली सरकार ने पिछले दिनों 4 और राज्यों उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के साथ बैठक करके इस बात पर सहमति बनायी थी कि इन सभी राज्यों में वैट की दर एक सामान हो। यानी इस एक्ट में बदलाव से सरकार बाकी के राज्यों के साथ तालमेल बैठाने के लिये कभी भी बस एक कैबिनेट की बैठक करके वैट घटा या बढ़ा सकती है, बार-बार विधानसभा आने की ज़रूरत नहीं।
लेकिन इसमें दिल्ली वालों को शंका इसी बात पर हो सकती है कि क्या वैट के रेट बढ़ सकते हैं? क्योंकि दिल्ली सरकार के पास कुल आमदनी का 70 फीसदी वैट से आता है और दिल्ली सरकार ने लक्ष्य रखा है कि पिछले साल जहां 17000 करोड़ रुपये उसको वैट मिला था अबकी बार लक्ष्य बढ़ाकर 24000 करोड़ रुपये रखा गया है।
जो 11 सामान इस लिस्ट में हैं उनमें पेट्रोल, मोमबत्ती, शराब, पांच हज़ार से ऊपर की घड़ी, कोल्ड ड्रिंक, लॉटरी टिकट, तम्बाकू और गुटखा हैं। इन सभी पर अभी वैट की अधिकतम सीमा 20 फीसदी है। इसका मतलब है कि सरकार फिलहाल इन सामानों पर ज्यादा से ज्यादा 20 फीसदी की दर से वैट लग सकता है। लेकिन सरकार अब कैबिनेट के ज़रिये कभी भी इसको 30 फीसदी तक करने का फैसला लेने के लिए अधिकृत हो गयी।
दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि सरकार अपनी ही बात में विरोधाभास कर रही है और दोहरी बात करके झूठ बोल रही है। गुप्ता के मुताबिक़ सरकार ने बजट में कहा था कि वैट की दर नहीं बढ़ेंगी और अब सरकार ये बढ़ा रही है और हम इसकी निंदा करते हैं।
दिल्ली के डिप्टी सीएम और वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि महंगाई बढ़ने या वैट बढ़ने का प्रस्ताव नहीं है, ये केवल वैट के रेट को लचीला बनाने के लिए किया जा रहा है और कोई भी रेट में बढ़ोतरी या कटौती पूरी स्टडी के बाद होगी, अभी वैट बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
असल में दिल्ली सरकार ने पिछले दिनों 4 और राज्यों उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के साथ बैठक करके इस बात पर सहमति बनायी थी कि इन सभी राज्यों में वैट की दर एक सामान हो। यानी इस एक्ट में बदलाव से सरकार बाकी के राज्यों के साथ तालमेल बैठाने के लिये कभी भी बस एक कैबिनेट की बैठक करके वैट घटा या बढ़ा सकती है, बार-बार विधानसभा आने की ज़रूरत नहीं।
लेकिन इसमें दिल्ली वालों को शंका इसी बात पर हो सकती है कि क्या वैट के रेट बढ़ सकते हैं? क्योंकि दिल्ली सरकार के पास कुल आमदनी का 70 फीसदी वैट से आता है और दिल्ली सरकार ने लक्ष्य रखा है कि पिछले साल जहां 17000 करोड़ रुपये उसको वैट मिला था अबकी बार लक्ष्य बढ़ाकर 24000 करोड़ रुपये रखा गया है।
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