''ओमिक्रॉन की गंभीरता कम होने की संभावना'': बढ़ती चिंता के बीच स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा

सरकार ने कहा, "... इसके (ओमिक्रॉन स्ट्रेन) लक्षणों को देखते हुए इसके भारत सहित अन्य देशों में फैलने की संभावना है." इसमें कहा गया है कि आने वाले कुछ दिनों और सप्ताह में ओमिक्रॉन के और मामले देखे जा सकते हैं.

''ओमिक्रॉन की गंभीरता कम होने की संभावना'': बढ़ती चिंता के बीच स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा

कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन को लेकर भारत में बढ़ी चिंताएं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

नई दिल्ली:

भारत में कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के दस्तक के साथ ही लोगों में चिंता बढ़ने लगी है. इस बीच सरकार ने लोगों से टीकाकरण कराने की अपील की है. सरकार ने यह भी कहा कि टीकाकरण की तेज गति और डेल्टा संस्करण के संपर्क में आने के बाद प्राप्त प्राकृतिक प्रतिरक्षा के कारण "ओमिक्रॉन की गंभीरता कम होने का अनुमान है".

शुक्रवार को जारी एक संक्षिप्त बयान में, सरकार ने कहा, "... इसके (ओमिक्रॉन स्ट्रेन) लक्षणों को देखते हुए इसके भारत सहित अन्य देशों में फैलने की संभावना है." इसमें कहा गया है कि आने वाले कुछ दिनों और सप्ताह में ओमिक्रॉन के और मामले देखे जा सकते हैं.

सरकार ने अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न के जवाब में कहा, "दक्षिण अफ्रीका के बाहर के देशों से ओमिक्रॉन के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं और इसके लक्षणों को देखते हुए देखते हुए, भारत सहित अधिक देशों में इसके फैलने की संभावना है ... लेकिन भारत में टीकाकरण की तेज गति और कोरोना के डेल्टा वैरिएंट के संपर्क में आने के बाद प्राप्त प्राकृतिक प्रतिरक्षा के कारण ओमिक्रॉन की गंभीरता कम होने का अनुमान है." 

इसमें आगे कहा गया, "इस बात का कोई सबूत नहीं है कि मौजूदा टीके ओमिक्रॉन पर काम नहीं करते हैं ... वैक्सीन सुरक्षा एंटीबॉडी के साथ-साथ सेल्यूलर प्रतिरक्षा द्वारा भी है ... इसलिए, टीकों से अभी भी गंभीर बीमारी से सुरक्षा प्रदान करने की पूरी उम्मीद है. उपलब्ध टीकों के साथ टीकाकरण कराना बेहद महत्वपूर्ण है."

मौजूदा परीक्षणों में कोविड संक्रमण के लक्षण दिखाई देंगे, लेकिन वे ओमिक्रॉन के निश्चित प्रमाण नहीं दे सकते.

"... ओमिक्रॉन संस्करण की पुष्टि के लिए, जिनोम सिक्वेंसिंग की आवश्यकता है," इस वैरिएंट को लेकर डब्ल्यूएचओ की चेतावनी पर सरकार ने जो दिया. पिछले हफ्ते दक्षिण अफ्रीका से ओमिक्रॉन वैरिएंट की पहली बार सूचना मिली थी.

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शोधकर्ता इस बात की पुष्टि करने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या यह डेल्टा की तुलना में अधिक तेजी से फैल सकता है और कितना घातक साबित हो सकता है.  यह भी जानने की कोशिश की जा रही है कि मौजूदा टीके इस वैरिएंट के खिलाफ कितने प्रभावी होंगे.