
पटेल समुदाय के आंदोलन की फाइल फोटो।
अहमदाबाद:
पिछले दो माह से जब से गुजरात में पाटीदार यानि पटेल समुदाय ने आरक्षण के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में शामिल करने की मांग शुरू की है तब से पटेल आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल और उनके साथियों की तरफ से हर मंच से एक बात लगातार कही जा रही है कि पटेलों को 12वीं में 90 प्रतिशत अंक आने के बावजूद मेडिकल में प्रवेश नहीं मिलता, जबकि जिन्हें आरक्षण मिला है उन्हें 40 प्रतिशत पर भी प्रवेश मिल जाता है।
एनडीटीवी ने जब इस तथ्य की समझ के लिए पिछले तीन वर्षों के मेडिकल एडमीशन के डाटा जुटाए तो तस्वीर बिलकुल अलग ही सामने आई। गुजरात में मेडिकल में एडमीशन सेन्ट्रल एडमीशन कमेटी के द्वारा 12वीं की मेरिट के आधार पर होती है। गुजरात की नंबर वन मेडिकल कालेज मानी जाती है अहमदाबाद की बी जे मेडिकल कालेज। इसमें प्रवेश के आंकड़े देखें तो 2013 - 14 में जनरल कोटा में मेरिट प्रवेश बंद हुआ 91.33 प्रतिशत पर जबकि ओबीसी (सामाजिक एवं शैक्षणिक तौर पर पिछड़ी जातियां) का प्रवेश 86.38 प्रतिशत पर बंद हुआ और अनुसूचित जाति का प्रवेश 84.17 पर बंद हुआ। इसी तरह 2014 - 15 में जनरल 95.02, ओबीसी 91.75 और अनुसूचित जाति 89.73 पर बंद हुआ। इस साल यानि 2015 - 16 के लिए यह मेरिट रहा जनरल 95.80, ओबीसी 93.10 और एससी 92.02। यानि प्रवेश में 3 से 4 प्रतिशत का ही अंतर रहा।
दलित अधिकार के लिए लड़ने वाले वकील और कार्यकर्ता जिग्नेश मेवाणी का आरोप है कि पाटीदार आंदोलन में जानबूझकर गलत तथ्य पेश किए जा रहे हैं। ऐसा सिर्फ प्रोपेगंडा करने के लिए ही किया जा रहा है। सच्चाई यही है कि जो अमीर लोग हैं वे 50 प्रतिशत पर भी मेडिकल में एडमीशन पा रहे हैं। सिर्फ पैसे के दम पर सेल्फ फाइनेन्स कालेज में मैनेजमेन्ट कोटा में प्रवेश मिल रहा है। हालांकि यह तथ्य भी प्रामाणिक नहीं हैं, लेकिन मेडिकल प्रवेश में बहुत ज्यादा प्रतिशत का अंतर होने की बात सही नहीं है।
इन तथ्यों के बारे में जब पटेलों के उभरते नेता हार्दिक पटेल से पूछा गया तो वे गोल मोल जवाब दे गए। उन्होंने कहा कि यह तो सिर्फ इस साल के आंकड़े हैं, वे 2009 से पुराने आंकड़े पेश करेंगे। इतना कहकर वे आगे का जवाब टाल गए। हालांकि वह एनडीटीवी के तथ्यों को झुठला नहीं सके और कहा कि वे अन्य तथ्य सामने लेकर आएंगे।
आंदोलन कोई भी हो, उसमें जो तथ्य पेश किए जाएं उनमें सत्यता जरूरी हो जाती है, वरना विश्वसनीयता पर सवाल उठता है।
एनडीटीवी ने जब इस तथ्य की समझ के लिए पिछले तीन वर्षों के मेडिकल एडमीशन के डाटा जुटाए तो तस्वीर बिलकुल अलग ही सामने आई। गुजरात में मेडिकल में एडमीशन सेन्ट्रल एडमीशन कमेटी के द्वारा 12वीं की मेरिट के आधार पर होती है। गुजरात की नंबर वन मेडिकल कालेज मानी जाती है अहमदाबाद की बी जे मेडिकल कालेज। इसमें प्रवेश के आंकड़े देखें तो 2013 - 14 में जनरल कोटा में मेरिट प्रवेश बंद हुआ 91.33 प्रतिशत पर जबकि ओबीसी (सामाजिक एवं शैक्षणिक तौर पर पिछड़ी जातियां) का प्रवेश 86.38 प्रतिशत पर बंद हुआ और अनुसूचित जाति का प्रवेश 84.17 पर बंद हुआ। इसी तरह 2014 - 15 में जनरल 95.02, ओबीसी 91.75 और अनुसूचित जाति 89.73 पर बंद हुआ। इस साल यानि 2015 - 16 के लिए यह मेरिट रहा जनरल 95.80, ओबीसी 93.10 और एससी 92.02। यानि प्रवेश में 3 से 4 प्रतिशत का ही अंतर रहा।
दलित अधिकार के लिए लड़ने वाले वकील और कार्यकर्ता जिग्नेश मेवाणी का आरोप है कि पाटीदार आंदोलन में जानबूझकर गलत तथ्य पेश किए जा रहे हैं। ऐसा सिर्फ प्रोपेगंडा करने के लिए ही किया जा रहा है। सच्चाई यही है कि जो अमीर लोग हैं वे 50 प्रतिशत पर भी मेडिकल में एडमीशन पा रहे हैं। सिर्फ पैसे के दम पर सेल्फ फाइनेन्स कालेज में मैनेजमेन्ट कोटा में प्रवेश मिल रहा है। हालांकि यह तथ्य भी प्रामाणिक नहीं हैं, लेकिन मेडिकल प्रवेश में बहुत ज्यादा प्रतिशत का अंतर होने की बात सही नहीं है।
इन तथ्यों के बारे में जब पटेलों के उभरते नेता हार्दिक पटेल से पूछा गया तो वे गोल मोल जवाब दे गए। उन्होंने कहा कि यह तो सिर्फ इस साल के आंकड़े हैं, वे 2009 से पुराने आंकड़े पेश करेंगे। इतना कहकर वे आगे का जवाब टाल गए। हालांकि वह एनडीटीवी के तथ्यों को झुठला नहीं सके और कहा कि वे अन्य तथ्य सामने लेकर आएंगे।
आंदोलन कोई भी हो, उसमें जो तथ्य पेश किए जाएं उनमें सत्यता जरूरी हो जाती है, वरना विश्वसनीयता पर सवाल उठता है।
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