
दिवाली का त्योहार आने वाला है. हर साल करोड़ों रुपये के मिट्टी के दीये बनाए जाते है. जिसे त्योहार के दिन उपयोग करने के बाद फेक दिया जाता है. इन दीयों का बाद में कोई उपयोग नहीं होता है. दीये बनाने वाले अपनी पूरी मेहनत से इसका निर्माण करते हैं लेकिन उनके मेहनत को बस महज एक रात में उपयोग करने के बाद खत्म कर दिया जाता है. चंडीगढ़ स्थित एक ग्रुप ने उपयोग में लाए दीये को एक जगह जमा कर फिर से उसे उपयोग करने लायक बनाने का काम शुरू किया है. साथ ही ग्रुप ने इससे मिलने वाले पैसे का उपयोग बच्चों की शिक्षा पर खर्च करने का फैसला लिया है.
ग्रुप के एक सदस्य ने ANI को बताया कि उन लोगों की तरफ से यह काम 2018 से किया जा रहा है. उन लोगों का उद्देश्य है कि खराब हो चुके समान का उपयोग कर के उससे कुछ पैसा जमा किया जाए जिसका उपयोग बच्चो की शिक्षा पर किया जाएगा.साथ ही उन्होंने कहा कि DLF मॉल ने उन्हें इसे बेचने के लिए जगह भी उपलब्ध करवा दिया है.
Chandigarh based group runs a project to reuse discarded earthen lamps to raise money for children's education
— ANI (@ANI) October 26, 2020
"We've been running it since 2018. We wanted to set an example of making viable money from waste. DLF mall has agreed to give us space for sale purposes," says a member pic.twitter.com/iCdNmcZkhb
गौरतलब है कि इसी तरह से एक योजना दिल्ली विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) और दिल्ली पुलिस के सहयोग से भी शुरू किया गया है. सेक्स वर्कर्स (Sex Worker) को आत्मनिर्भर बनाने के लिए नई मुहिम की शुरुआत की गयी है. इसके तहत दीपावली (Deepawali) में Delhi की सेक्स वर्कर्स के हाथों से सजे दीये बेचे जाएंगे.दिल्ली के रेड लाइट एरिया GB रोड पर तकरीबन 2000 से ज्यादा सेक्स वर्कर्स काम करती हैं. इनका जीवनयापन देह व्यापार से होता है. दिल्ली विधिक सेवा प्राधिकरण और कमला मार्किट पुलिस की प्रेरणा से देह व्यापार के दलदल में फंसी तकरीबन 200 महिलाओं ने जिस्म के इस व्यापार को छोड़ने का साहस दिखाया है.
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