
बिहार में सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड में नागरिकता कानून को लेकर चल रहा विवाद लगातार बढ़ता ही जा रहा है. मंगलवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रशांत किशोर पर तीखे बयान और प्रशांत किशोर की तरफ से किये गए पलटवार के बाद, अब जदयू नेता अजय आलोक ने प्रशांत किशोर पर हमला बोला है. उन्होंने प्रशांत किशोर की तुलना कोरोनावायरस से की है. अजय आलोक ने कहा है "यह शख्स भरोसे के काबिल नहीं है... वह (प्रधानमंत्री नरेंद्र) मोदी जी और (बिहार के मुख्यमंत्री) नीतीश जी का भरोसा नहीं जीत पाया... वह आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए काम करता है, (कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष) राहुल गांधी से बात करता है, (पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री) ममता दीदी के साथ बैठता है... इस पर कौन भरोसा करेगा...? हम खुश हैं कि यह कोरोनावायरस (Coronavirus) हमें छोड़कर जा रहा है... वह जहां जाना चाहे, जा सकता है..."
Ajay Alok, JDU on Prashant Kishor: This man is not trustworthy.He could not win the trust of Modi ji and Nitish ji. He works for AAP, talks to Rahul Gandhi, sits with Mamata didi. Who will trust him? We are happy this #coronavirus is leaving us, he can go wherever he wants to. pic.twitter.com/bC7AWgIgC9
— ANI (@ANI) January 29, 2020
गौरतलब है कि नागरिकता कानून को लेकर प्रशांत किशोर लगातार अपनी पार्टी पर हमलावर रहे हैं. जिसके बाद मंगलवार को नीतीश कुमार ने कहा था कि प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) को बीजेपी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह (Amit Shah) के कहने पर पार्टी में रखा था, अब उन्हें रहना है तो रहें नहीं तो जाएं. नीतीश कुमार ने कहा कि अगर उन्हें रहना है तो पार्टी के बुनियादी ढांचे को अंगीकार करना होगा. नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने पटना में एक संवादाता सम्मेलन में कहा था कि सब लोग आज़ाद हैं अपनी अपनी राय रखने के लिए. उन्होंने पार्टी नेता पवन वर्मा पर कहा कि एक व्यक्ति क्या चिट्ठी लिखी उसपर हमने कह दिया है. नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर का नाम लिए बिना कहा कि कोई ट्वीट कर रहा है... तो ट्वीट करें हमें क्या कहना है... क्या मतलब है? नीतीश कुमार ने कहा कि जब तक किसी की इच्छा रहेगी पार्टी में रहने की, वो रहेगा, जाना चाहेगा तो जाएगा.
पलटवार करते हुए प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार पर झूठ बोलने का आरोप लगाया था. प्रशांत किशोर ने ट्वीट कर कहा था , 'मुझे JDU में क्यों और कैसे लेकर आए इस बारे में झूठ बोल रहे हैं. अपने ही रंग में रंगने की बेहद खराब कोशिश कर करे हैं. लेकिन अगर आप सच बोल रहे हैं तो कौन यह भरोसा करेगा कि अभी भी आपमें इतनी हिम्मत है कि अमित शाह द्वारा भेजे गए आदमी की बात न सुनें?
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