
नई दिल्ली:
1947 में विभाजन के बाद जब मशहूर चित्रकार सैयद हैदर रजा का परिवार पाकिस्तान चला गया था, तब हैदर रजा ने भारत में ही रहने का फैसला किया था. इसके पीछे कारण उनकी मातृभूमि के प्रति वफादारी तो थी ही, लेकिन इसकी एक वजह महात्मा गांधी के प्रति उनका लगाव भी था.
पिछले माह 94 साल की उम्र में दुनिया से विदा लेने वाले इस मशहूर कलाकार ने लेखक और कवि अशोक वाजपेयी को यह बात बताई थी. वाजपेयी ने इंडियन वूमन प्रेस कॉर्प्स में कलाकार की याद में आयोजित किए गए एक समारोह में रजा से जुड़ी बातें याद करते हुए यह बात साझा की.
रजा की उम्र महज आठ साल रही होगी, जब उन्होंने मध्यप्रदेश के मंडला में एक जनसभा के दौरान ‘राष्ट्रपिता’ महात्मा गांधी को पहली बार देखा था.
वाजपेयी ने बताया, ‘‘वह कहा करते थे- ‘यह मेरा देश है. मैं यहां से कहां जाऊंगा?’ लेकिन मुझको उनकी इस बात पर यकीन नहीं होता था. एक बार बहुत बार पूछने पर उन्होंने मुझे बताया, ‘जब बंटवारा हुआ, तो मेरा परिवार चला गया. लेकिन मुझे लगता था कि अगर मैं भी चला जाऊंगा तो मैं उस व्यक्ति के साथ विश्वासघात करूंगा, जिसे मैंने पहली बार आठ साल की उम्र में देखा था.
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
पिछले माह 94 साल की उम्र में दुनिया से विदा लेने वाले इस मशहूर कलाकार ने लेखक और कवि अशोक वाजपेयी को यह बात बताई थी. वाजपेयी ने इंडियन वूमन प्रेस कॉर्प्स में कलाकार की याद में आयोजित किए गए एक समारोह में रजा से जुड़ी बातें याद करते हुए यह बात साझा की.
रजा की उम्र महज आठ साल रही होगी, जब उन्होंने मध्यप्रदेश के मंडला में एक जनसभा के दौरान ‘राष्ट्रपिता’ महात्मा गांधी को पहली बार देखा था.
वाजपेयी ने बताया, ‘‘वह कहा करते थे- ‘यह मेरा देश है. मैं यहां से कहां जाऊंगा?’ लेकिन मुझको उनकी इस बात पर यकीन नहीं होता था. एक बार बहुत बार पूछने पर उन्होंने मुझे बताया, ‘जब बंटवारा हुआ, तो मेरा परिवार चला गया. लेकिन मुझे लगता था कि अगर मैं भी चला जाऊंगा तो मैं उस व्यक्ति के साथ विश्वासघात करूंगा, जिसे मैंने पहली बार आठ साल की उम्र में देखा था.
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