
नयी दिल्ली:
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक पिता को उसके अवयस्क बच्चे से मिलने का अधिकार देते हुए व्यवस्था दी है कि पेरेंट्स चाहे कितना ही शादी के बाद के झगड़ों में क्यों न उलझे हों, हर बच्चे को अपने माता पिता का प्यार पाने का हक होता है.
उच्च न्यायालय ने अपनी व्यवस्था में कहा, ‘‘माता पिता दोनों के ही प्यार और दुलार से बच्चे को वंचित करना उसके हक में नहीं होता. बच्चा जिस अभिभावक के संरक्षण में है, वह अगर दूसरे अभिभावक से उसे अलग रखने की कोशिश करता है तो इसका मतलब यह है कि वह भविष्य में बच्चे पर पड़ने वाले इसके गंभीर परिणामों को नहीं समझता.’’
प्यार पाना बच्चों का मूलभूत अधिकार
न्यायमूर्ति प्रदीप नंद्राजोग और न्यायमूर्ति योगेश खन्ना की पीठ ने कहा कि दोनों ही अभिभावकों का प्यार और दुलार पाना बच्चों का मूलभूत अधिकार है. अगर अदालत मुलाकात के समय को लेकर दोनों पक्षों को सहमत करने का प्रयास करती है और अंतरिम संरक्षण अवधि असफल रहती है तो अदालत को बच्चे के हित में कदम उठाते हुए बेहतर व्यवस्था देनी चाहिए.
इसके साथ ही पीठ ने केन्या में रह रहे एक व्यक्ति के लिए व्यवस्था दी कि वह जब भी भारत आएगा, तब वह अपने अवयस्क पुत्र से मिल सकता है जो फिलहाल अपनी मां के साथ रह रहा है.
उच्च न्यायालय ने यह व्यवस्था पिता की याचिका पर दी जिसने अपने बच्चे से मिलने का अधिकार और रातभर उसे अपने पास रखने का अधिकार मांगा था. (एजेंसी से इनुपट)
उच्च न्यायालय ने अपनी व्यवस्था में कहा, ‘‘माता पिता दोनों के ही प्यार और दुलार से बच्चे को वंचित करना उसके हक में नहीं होता. बच्चा जिस अभिभावक के संरक्षण में है, वह अगर दूसरे अभिभावक से उसे अलग रखने की कोशिश करता है तो इसका मतलब यह है कि वह भविष्य में बच्चे पर पड़ने वाले इसके गंभीर परिणामों को नहीं समझता.’’
प्यार पाना बच्चों का मूलभूत अधिकार
न्यायमूर्ति प्रदीप नंद्राजोग और न्यायमूर्ति योगेश खन्ना की पीठ ने कहा कि दोनों ही अभिभावकों का प्यार और दुलार पाना बच्चों का मूलभूत अधिकार है. अगर अदालत मुलाकात के समय को लेकर दोनों पक्षों को सहमत करने का प्रयास करती है और अंतरिम संरक्षण अवधि असफल रहती है तो अदालत को बच्चे के हित में कदम उठाते हुए बेहतर व्यवस्था देनी चाहिए.
इसके साथ ही पीठ ने केन्या में रह रहे एक व्यक्ति के लिए व्यवस्था दी कि वह जब भी भारत आएगा, तब वह अपने अवयस्क पुत्र से मिल सकता है जो फिलहाल अपनी मां के साथ रह रहा है.
उच्च न्यायालय ने यह व्यवस्था पिता की याचिका पर दी जिसने अपने बच्चे से मिलने का अधिकार और रातभर उसे अपने पास रखने का अधिकार मांगा था. (एजेंसी से इनुपट)
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